इमरान खान की बहन के बयान से मचा बवाल, साइबर एजेंसी ने भेजा समन, मामले का 'ऑपरेशन सिंदूर' से क्या है कनेक्शन?
tatement by Imran Khan's sister Noreen Niazi : पिछले साल मई में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नौरीन नियाजी के बयान ने बवाल खड़ा कर दिया है। खबरों के अनुसार, बयान के बाद नौरीन नियाजी के खिलाफ पाकिस्तान की एंटी साइबर क्राइम ब्रांच (NCCIA) ने शनिवार को उनके बयान को आपत्तिजनक मानते हुए समन जारी किया है। एजेंसी ने उन्हें 20 जुलाई (सोमवार) को इस्लामाबाद स्थित कार्यालय में पेश होने का नोटिस जारी किया है।
NCCIA ने बयान पर जताई आपत्ति
पिछले साल मई में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नौरीन नियाजी के बयान ने बवाल खड़ा कर दिया है। खबरों के अनुसार, बयान के बाद नौरीन नियाजी के खिलाफ पाकिस्तान की एंटी साइबर क्राइम ब्रांच (NCCIA) ने शनिवार को उनके बयान को आपत्तिजनक मानते हुए समन जारी किया है। एजेंसी ने उन्हें 20 जुलाई (सोमवार) को इस्लामाबाद स्थित कार्यालय में पेश होने का नोटिस जारी किया है।
नौरीन नियाजी के इस दावे से मचा बवाल
नौरीन नियाजी ने अपने बयान में दावा किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह पस्त कर दिया था। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की हालत इतनी खराब हो गई थी कि भारत के लगातार हमलों के बाद वो मदद मांगने के लिए अंतरराष्ट्रीय ताकतों के पास गए। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के सामने कुछ शर्तें रखकर बात करने को तैयार हो गए।
आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ पर लगाया यह आरोप
नौरीन ने कहा कि इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ झूठी जीत की कहानियां गढ़कर पाकिस्तानी अवाम को गुमराह कर रहे हैं। नौरीन ने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि भारत ने इसराइल के कहने पर संघर्ष को आगे नहीं बढ़ाया क्योंकि पाकिस्तान इसराइल को मान्यता देने वाला था।
'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर पहले भी हो चुके हैं दावे
नौरीन नियाजी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के कुछ अन्य राजनीतिक नेताओं की ओर से भी 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर अलग-अलग दावे किए जा चुके हैं। हालांकि इन बयानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें संबंधित नेताओं के व्यक्तिगत राजनीतिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।

