नार्वे में मनेगा गाँधी सप्ताह

- दीपक असीम

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नार्वे में इस साल को गाँधीजी की धूम रहने वाली है। न सिर्फ गाँधी सप्ताह मनाया जाएगा बल्कि नार्वे के एक जिले से स्वीडन की सीमा तक शांति पदयात्रा भी निकलेगी और यह सब होगा के एवं गाँधीवादी समाजसेवी के प्रयासों और सहयोग से।


गाँधीजी की पोती सुमित्रा गाँधी कुलकर्णी भी मित्तल के साथ नार्वे जा रही हैं। पदयात्रा का नेतृत्व भी वही करेंगी और वहाँ होने वाले 'शांति संवाद' की अध्यक्षता भी। मित्तल बताते हैं कि नार्वे में कई लोग इस बार 2 अक्टूबर गाँधी जयंती पर कुछ ऐसा करना चाहते थे जिससे गाँधीजी की याद ताजा हो जाए और अहिंसा तथा शांति का संदेश फिर विश्व में गूँजे।

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नार्वे के गाँधी भक्तों ने तय किया कि वे एड्सकॉक नामक शहर से स्वीडन की सीमा तक पैदल जाएँगे। इस शहर से स्वीडन सीमा की दूरी है करीब 25 किलोमीटर। ये सभी गाँधी प्रेमी विदेशी मूल के हैं। आयोजन में भारतवंशी सुमित्राजी व मित्तल ही रहेंगे।

नार्वे में 30 सितंबर से गाँधीजी पर केंद्रित विभिन्न कार्यक्रम शुरू हो जाएँगे, जिनका सिलसिला 5 अक्टूबर तक जारी रहेगा। 'शांति संवाद' में स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड समेत तमाम योरपीय देशों के गाँधी प्रेमी और शांति के लिए काम करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधि आएँगे।

मित्तल से जब पूछा गया कि ये कार्यक्रम नार्वे में ही क्यों हो रहे हैं तो उनका जवाब था कि नार्वे विश्व शांति का नोबेल पुरस्कार देने वाला देश है। एक बार भी शांति का नोबेल गाँधीजी को नहीं दिया गया। इस देश के बुद्धिजीवियों में एक अपराधबोध इसे लेकर है। संभवतः इसीलिए अन्य देशों के मुकाबले नार्वे के लोग गाँधी के प्रति अधिक झुकाव रखते हैं।



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