चन्द्रमा के दर्शन पर, इफ्तार के आमंत्रण पर। तज़रीद के आवरण में, ज़ुहाद के वातावरण में। शोखियां पर्याप्त हों, जब रोज़े समाप्त हों। नेमतें हों, नाम हो, प्रत्येक से सलाम हो। परस्पर गलबहियां हों, शीरो-शकर सिवइयां हों। संज्ञान हो आबिदों का, सम्मान...