रोहिणी आश्रम मामला : हाईकोर्ट ने सीबीआई से मांगी रिपोर्ट

पुनः संशोधित गुरुवार, 4 जनवरी 2018 (18:26 IST)
नई दिल्ली। ने उत्तर दिल्ली के उस आश्रम के संस्थापक की हरकतों को अत्यधिक संदेहास्पद बताया, जहां लड़कियों को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था। उसने से यह बताने को कहा कि आश्रम का संस्थापक अब कहां है और इस बारे में रिपोर्ट मांगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने पैनल के तर्क में प्रथम दृष्टया दम पाया कि आश्रम और उसका संस्थापक वहां रहने वाली लड़कियों से उनके परिजनों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करवाते थे।

पैनल की नियुक्ति अदालत ने ही की थी। पैनल ने कहा कि ऐसा लगता है कि परिजनों के खिलाफ शिकायतें इसलिए दर्ज करवाई जाती थीं, ताकि वे आश्रम और दीक्षित के खिलाफ मामले दर्ज ना करवा सकें।
अदालत ने कहा कि वह किसी भी वास्तविक, कानूनसम्मत और सच्ची धार्मिक गतिविधि में दखल नहीं देंगे लेकिन कपटी या गैरकानूनी गतिविधि को समर्थन भी नहीं देंगे। अदालत गैर सरकारी संगठन फाउंडेशन फॉर सोशल एम्पॉवरमेंट की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। (भाषा)



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