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Last Modified: मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 (15:40 IST)

सिद्धारमैया का वो मास्टरस्ट्रोक, जिसने DK के 'शक्ति प्रदर्शन' पर फेरा पानी

Karnataka News
Karnataka Congress Crisis: कर्नाटक में 2023 की जीत के बाद से ही कांग्रेस की सरकार उठापटक थमने का नाम ही नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच की खटास अब 'ढाई-ढाई साल' के फॉर्मूले से निकलकर खुलेआम शक्ति प्रदर्शन तक पहुंच गई है। जहां एक तरफ डीके खेमा 136 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है, वहीं सिद्धारमैया ने अपने करीबियों को विदेशी दौरे पर ले जाकर एक ऐसी बिसात बिछाई है, जिसने बेंगलुरु की राजनीति में खलबली मचा दी है।

क्या है सिद्धा समर्थकों की विदेश यात्रा का राज?

खबर है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने करीबी 27 विधायकों को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर ले जा रहे हैं। आधिकारिक तौर पर इसे 'रूटीन विजिट' और सरकारी योजनाओं का अध्ययन बताया जा रहा है, लेकिन सियासी गलियारों में इसकी टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि डीके शिवकुमार द्वारा बुलाई जाने वाली प्रस्तावित बैठक में कोरम (संख्या बल) को कम करना इसकी मुख्य वजह है। सिद्धारमैया की यह योजना 6 मार्च को होने वाले बजट सत्र से ठीक पहले विधायकों को एकजुट रखना और यह दिखाना कि सत्ता की चाबी अभी भी मुख्यमंत्री के हाथ में है और वह अपने गुट को बिखरने नहीं देंगे।

डीके समर्थक आरपार के मूड में

डीके शिवकुमार के वफादार विधायक रविकुमार गौड़ा ने खुला दावा किया है कि सभी 136 विधायक डीके के साथ हैं। शिवकुमार खेमे का तर्क सीधा है कि 40 साल की राजनीति और संकट के समय पार्टी को बचाने का इनाम 'मुख्यमंत्री की कुर्सी' होनी चाहिए।
 
डीके समर्थकों का मानना है कि अब समय आ गया है कि नेतृत्व परिवर्तन किया जाए।  राजनीति एक गेम है और इसका नतीजा जल्द आएगा। शिवकुमार के करीबी एक विधायक का यह बयान साफ करता है कि कांग्रेस के अंदर अब 'वेट एंड वॉच' की स्थिति खत्म हो रही है।

शह और मात का खेल

कर्नाटक कांग्रेस में फिलहाल 'शह और मात' का खेल चल रहा है। सिद्धारमैया का विधायकों को विदेश ले जाना एक 'सुरक्षा कवच' है, तो डीके शिवकुमार का 136 विधायकों का दावा एक 'सीधा हमला'। हाईकमान के लिए सबसे बड़ी यह है कि वह इस आंतरिक कलह से कैसे निपटता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि इस मसले का हल जल्द ही ‍नहीं निकाला गया तो कर्नाटक सरकार भी खतरे में पड़ सकती है। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 
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