PM मोदी की सुरक्षा में 1 दिन का खर्चा 1 करोड़ 62 लाख रुपए, SPG के अलावा इन एजेंसियों के हाथों में रहती है कमान, चूक हुई तो कौन होता है जिम्मेदार?

Last Updated: गुरुवार, 6 जनवरी 2022 (12:54 IST)
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में बुधवार को पाकिस्तानी सीमा से सिर्फ 30 किलोमीटर दूर पंजाब के फिरोजपुर जिले में बड़ी चूक सामने आई। सड़क मार्ग से रैली में शामिल होने जा रहे प्रधानमंत्री के काफिले को कुछ प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया। 20 मिनट तक प्रधानमंत्री मोदी का काफि‍ला फ्लाईओवर पर फंसा रहा। इसके बाद से सियासी बवाल मचा हुआ है। सुरक्षा में इस चूक की जिम्मेदारी किसकी है? कौनसी एजेंसियां पीएम की सुरक्षा में तैनात रहती हैं। प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कैसे होता है प्रोटोकॉल का पालन। जानिए पूरी प्रक्रिया-
कितना खर्च होता है सुरक्षा पर : 2020 में संसद में दिए एक प्रश्न के लिखित जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री की सुरक्षा पर हर दिन 1 करोड़ 62 लाख रुपए खर्च होते हैं। राज्यमंत्री ने लोकसभा में बताया था कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी सिर्फ प्रधानमंत्री को ही सुरक्षा देता है।


इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुआ गठन : 1981 से पहले भारत के प्रधानमंत्री के आवास की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस के उपायुक्त की होती थी। इसके बाद सुरक्षा के लिए STF का गठन किया गया। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक कमेटी बनी और 1985 में एक खास स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट बनाई गई। तब से इसी के पास प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा है।

इन एजेंसियों पर जिम्मेदारी :प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी SPG, एडवांस सिक्योरिटी संपर्क टीम (ASL), राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर रहती है।

ASL के पास प्रधानमंत्री के दौरे से जुड़ी हर जानकारी से अपडेट रहती है। केंद्रीय एजेंसी ASL प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल और रूट की सुरक्षा जांच करता है। यह टीम सीधे केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क में रहती हैं। केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी ASL की सहायता से प्रधानमंत्री के दौरे पर हर गतिविधि पर पैनी निगाह रखते हैं। स्थानीय पुलिस प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर रूट से लेकर कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा संबंधी नियम बनाती है। लेकिन पूरी रूट का आखिरी फैसला एसपीजी के पास होता है। SPG स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर काम करती है। SPG प्रधानमंत्री से मिलने वाले हर व्यक्ति की तलाशी और आसपास की सुरक्षा देखती है। प्रधानमंत्री के काफिले का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी उस राज्य के डीजीपी की भी होती है।

क्या होता है प्रोटोकॉल :प्रधानमंत्री के दौरे से पहले उस रास्ते की जांच सुरक्षा व्यवस्था की जांच सीनियर पुलिस अधिकारी PM के दौरे से पहले करते हैं। इस रास्ते पर सुरक्षा जांच रिहर्सल के समय SPG, स्थानीय पुलिस, खुफिया ब्यूरो और ASL टीम के अधिकारी सभी शामिल होते हैं। प्रधानमंत्री के दौरे के समय एक प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। प्रधानमंत्री किसी कार्यक्रम में हेलिकॉप्टर से किसी खास परिस्थिति के लिए कम से कम एक वैकल्पिक सड़क मार्ग तैयार रखने का नियम होता है।
आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं SPG कमांडो : भारत के प्रधानमंत्री सुरक्षा की जिम्‍मेदारी स्‍पेशल प्रोटेक्‍शन ग्रुप यानी SPG की होती है। प्रधानमंत्री के चारों ओर पहला सुरक्षा घेरा SPG जवानों का ही होता है। PM की सुरक्षा में लगे इन जवानों को अमेरिका की सीक्रेट सर्विस की गाइडलाइंस के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है। इनके पास MNF-2000 असॉल्ट राइफल, ऑटोमेटिक गन और 17 एम रिवॉल्वर जैसे आधुनिक हथियार होते हैं। प्रधानमंत्री को सुरक्षा देने की पहली जिम्मेदारी भले ही SPG की हो, लेकिन किसी राज्य के दौरे के समय स्थानीय पुलिस और सिविल प्रशासन भी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होता है।
जैमर गाड़ियों का काफिला : एक जैमर वाली गाड़ी भी काफिले के साथ चलती है। ये सड़क के दोनों ओर 100 मीटर दूरी तक किसी भी रेडियो कंट्रोल या रिमोट कंट्रोल डिवाइस के को जाम कर देते हैं, इससे रिमोट से चलने वाले बम या IED में विस्फोट नहीं होने देता।



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