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एलन मस्क की भारत को चेतावनी: दिल्ली की जन्म दर फिनलैंड से भी कम, बताया मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा

elon musk
भारत की प्रजनन दर अब रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे आकर 1.9 रह गई। यह दर किसी भी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जाती है। स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने भारत की घटती जन्म दर को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि घटती प्रजनन दर मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है। 
 
एलन मस्क ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि भारत की जन्म दर अब रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आ चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षित वर्ग में यह दर काफी पहले ही इस स्तर से नीचे पहुंच चुकी थी।
 
मस्क ने अपनी पोस्ट में एफ पोस्ट के आंकड़ों का हवाला दिया, जिसमें भारत की प्रजनन दर में लगातार गिरावट की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली की प्रजनन दर 1.2 है जो फिनलैंड से भी कम है।

दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश है भारत

भारत 2023 में ही चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया था। वर्तमान में भारत की आबादी 1.46 अरब से अधिक है। हालांकि यहां अब प्रजनन दर चिंता का विषय बन गई है। कम जन्म दर के कारण भविष्य में युवाओं की तुलना में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। बिहार में प्रति महिला लगभग 3.0 बच्चों के साथ देश की सबसे उच्च प्रजनन दर बनी हुई है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह दर 2.4 है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में प्रजनन दर 1.6 और 1.8 के बीच है।
 

क्यों चिंतित हैं एलन मस्क?

रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंचा आंकड़ा: रिप्लेसमेंट लेवल वह न्यूनतम प्रजनन दर होती है, जो किसी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जाती है। आमतौर पर यह दर 2.1 मानी जाती है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की 2025 विश्व जनसंख्या रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 1.9 जन्म प्रति महिला रह गई है, जो रिप्लेसमेंट रेट 2.1 से नीचे है। अर्थात औसतन भारतीय महिलाएं अब उतने बच्चे पैदा नहीं कर रही हैं, जितने किसी पीढ़ी के आकार को अगली पीढ़ी तक बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य में भारत की आबादी बढ़ने के बजाय धीरे-धीरे कम होने लगेगी।
 
शिक्षित और शहरी वर्ग में भारी गिरावट :  मस्क ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि देश के शिक्षित और संपन्न परिवारों ने बहुत पहले ही छोटे परिवारों को अपना लिया था। उदाहरण के तौर पर, देश की राजधानी दिल्ली की प्रजनन दर घटकर महज 1.2 रह गई है, जो यूरोपीय देश फिनलैंड से भी कम है। बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई जैसे महानगरों और दक्षिण भारत के राज्यों में भी यही स्थिति देखी जा रही है।
 
'डेमोग्राफिक डिविडेंड' खोने का डर : भारत के पास फिलहाल दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, जिसे भारत की आर्थिक ताकत (Demographic Dividend) माना जाता है। मस्क और अन्य विशेषज्ञों की चिंता यह है कि यदि जन्म दर इसी तरह गिरती रही, तो आने वाले कुछ दशकों में कामकाजी आबादी (Workforce) की संख्या कम होने लगेगी और फैक्ट्रियों व कंपनियों के लिए काम करने वाले लोग कम हो जाएंगे। भारत में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ेगी, जिससे देश के हेल्थकेयर और सोशल वेलफेयर सिस्टम पर भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा।
 
बढ़ती महंगाई और जीवनशैली : भारत के शहरों में बच्चों के पालन-पोषण का खर्च, शिक्षा की बढ़ती लागत और नौकरी की असुरक्षा के चलते युवा अब देर से शादी कर रहे हैं या 'सिंगल चाइल्ड' नीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। मस्क के अनुसार, यह 'हसल कल्चर' (सिर्फ करियर पर ध्यान देना) दुनिया के साथ-साथ अब भारत के भविष्य को भी प्रभावित कर रहा है।
 

जापान, कोरिया और चीन के रास्ते पर भारत?

मस्क का मानना है कि जो संकट आज जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देश झेल रहे हैं, भारत भी तेजी से उसी ओर बढ़ रहा है। यही वजह है कि उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े आबादी वाले देश को समय रहते सचेत करने का प्रयास किया है।
edited by : Nrapendra Gupta 
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