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Last Modified: मंगलवार, 20 जनवरी 2026 (13:22 IST)

46 साल पुरानी भाजपा के 45 साल के निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए नितिन नबीन के सामने 5 बड़ी चुनौतियां?

BJP National President Nitin Nabin faces 5 major challenges
46 साल पुरानी भारतीय जनता पार्टी की कमान अब 45 साल के नितिन नबीन के हाथों में होगी। मंगलवार को  दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में नितिन नबीन को निर्विरोध पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। विश्व में सबसे अधिक कार्यकर्ता वाली भाजपा ने अब अपनी संगठनात्मक विरासत को नई पीढ़ी के हाथों में सौंपते हुए 45 साल के नितिन नबीन को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है।  45 वर्ष की आयु में इस पद को संभालने वाले नितिन नबीन अब तक के सबसे युवा अध्यक्ष हैं। बतौर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के सामने पार्टी के निर्वतमान अध्यक्ष जेपी नड्डा के कामों को आगे बढना है, साथ पश्चिम बंगाल के साथ दक्षिण भारत में भगवा लहराने की चुनौती है। जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के रूप में नितिन नबीन का सफर बहुत आसान नहीं होने वाला है, उके सामने पांच प्रमुख चुनौतियां है।  
 
पश्चिम बंगाल के साथ 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव-भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के सामने पहली चुनौती पश्चिम  बंगाल में पार्टी को सत्ता में लाना है। पश्चिम बंगाल में भाजपा लाख कोशिशों के बाद  अब तक ममता का ग़ढ़ भेद नहीं सकी है। ऐसे में नितिन नबीन के सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती बंगाल में होने वाला विधानसभा चुनाव है। बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के  बाद भाजपा ने अपना पूरा फोकस बंगाल पर कर दिया है।

साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 38 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया था लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 18 से घटकर 12 रही गई थी. हलांकि पार्टी का वोट शेयर 39 फीसदी हो गया। पश्चिम बंगाल में जिस तरह सें विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान से पहले ही टीएमसी और भाजपा आमने-सामने है, ऐसे में बंगाल में चुनावी घमासान बेहद दिलचस्प होने जा  रहा है। आज राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद नितिन नबीन ने अपने पहले भाषण में ही पश्चिम बंगाल के साथ इस साल होने  वाले पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में जीत की हुंकार भी। 
 
पश्चिम बंगाल के बाद नितिन नबीन के सामने 2027 में होने वाला विधानसभा चुनाव बड़ी चुनौती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को जिस तरह से उत्तर प्रदेश में झटका लगा है उसके बाद राज्य में भाजपा की लगाातार तीसरी बार सत्ता में लाने की बड़ी चुनौती होगी। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार का असर पार्टी के कार्यकर्ता के मनोबल पर भी पड़ा है, इसलिए संगठन को अभी से युद्ध स्तर पर तैयार करना उनकी कार्ययोजना का मुख्य हिस्सा होगा। नितिन नबीन को केवल तात्कालिक चुनावों तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि उन्हें 2029 के आम चुनावों के लिए भाजपा को तैयार करना है।
 
दक्षिण भारत का दुर्ग भेदना- भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के सामने दक्षिण भारत का दुर्ग भेदना है। नितिन नबीन के सामने प्रधानमंत्री मोदी के मिशन दक्षिण को जमीन पर उतारना है। कर्नाटक के बाद दक्षिण के अन्य राज्यों में भाजपा अब भी एक बाहरी पार्टी के रूप में देखी जाती है। तमिलनाडु और केरल में पार्टी के वोट बैंक को सीटों में तब्दील करना और वहां की स्थानीय संस्कृति के साथ सामंजस्य बिठाना एक हिमालयी चुनौती है। इसके साथ ही नितिन नबीन के सामने असम में अपनी सत्ता को बरकरार रखना उनके लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होगा।
 
नई और पुरानी पीढ़ी के बीच संतुलन- 45 साल के भाजपा के नए राष्ट्रीय नितिन नबीन के सामने पार्टी में नई और पुरानी पीढ़ी  के बीच संतुलन साधना है। नितिन नबीन के सामने पार्टी के भीतर जनरेशन गैप को पाटना बड़ी चुनौती होगी। आज भाजपा पीढ़ी परिवर्तन के  दौर से गुजर रही है, ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को मान-सम्मान के साथ उनको नई युवा पीढ़ी से जोड़ना बड़ी चुनौती होगी। पुरानी पीढ़ी के नेताओं को विश्वास में लेकर नए कार्यकर्ताओं में जोश भरना और संगठन में बड़े बदलाव करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
 
गठबंधन के सहयोगियों का विश्वास जीतना-बतौर भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन के सहयोगियों को एकजुट भी रखना है। 2024 के लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद आज एनडीए के सहयोगी दल बहुत प्रभावी भूमिका में है। ऐसे में भाजपा के नए अध्यक्ष के सामने चुनौती अपने पुराने सहयोगियों को एकजुट रखने के साथ ही नए साथियों की तलाश करना भी है। तमिलाडु जैसे राज्यों में जहां भाजपा नए सहयोगियों की तलाश में वहां पर नितिन नबीन की भूमिका बहुत प्रभावी होगी।
 
संघ (RSS) के साथ समन्वय- भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के  सामने आरएसएस के साथ समन्यव बनाना बड़ी चुनौती है। निर्वतमान अध्यक्ष जेपी नड़्डा के समय आरएसएस और भाजपा के बीच की तल्खी के रिश्ते किसी से छिपे नहीं थे ऐसे में आरएसएस के साथ समन्वय बनाान और पार्टी की विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाना नितिन नबीन की पहली प्राथमिकता होगा। 
 
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