भगत की छपरी
- सतमीत कौर
फिर वो गुरुजी को गाँव के बाहर तक छोड़ कर उनसे इजाजत लेकर वापस चला आया। भाई मरदाना ने गुरुजी से पूछा- कि उस सिक्ख ने अपनी इतनी सेवा की, पर आपने उसके घर का सारा समान तोड़ दिया आपने ऐसा क्यों किया? मुझे भी समझाइए...।
श्री गुरु नानक देव जी ने कहा कि उस सिक्ख की सेवा परवान हो गई है। जब वो सिक्ख अपने घर पहुँचा तो उसने देखा कि उसकी झोपड़ी की जगह एक सुन्दर महल बना हुआ है। उसके अन्दर बहुत सारा सुन्दर सामान रखा है। वह सिक्ख बहुत खुश हुआ।
इस प्रकार गुरुजी ने ये शिक्षा दी कि भगवान कभी भी अमीर और गरीब नहीं देखता, वो तो सिर्फ श्रद्धा देखता है। जो उसकी दिल से सेवा करता है उसे उसकी सेवा का फल जरूर मिलता है।

