जीवन कोई सीधी राह नहीं है। इसमें कहीं ऊंचाई है, कहीं अंधेरा, कहीं रुकावटें। पर जो व्यक्ति इन सबके बीच अपने भीतर विश्वास का दीपक जलाए रखता है, वही मंजिल तक पहुंचता है। क्योंकि जो इंसान खुद पर भरोसा रखना जानता है, उसके लिए कोई भी कठिनाई स्थायी नहीं रहती। जीवन में जीत या हार का फैसला हालात नहीं करते — बल्कि यह तो मन की शक्ति से ही संभव होते है।
हर इंसान के भीतर एक अदृश्य ताकत होती है — विश्वास की शक्ति। यह तब जागती है जब सब रास्ते बंद नजर आते हैं, और भीतर से एक धीमी-सी आवाज उठती है — 'बस एक बार और कोशिश कर।' यही आवाज इंसान को गिरकर भी उठने की प्रेरणा देती है। जब व्यक्ति उस आवाज को सुन लेता है और प्रयास करता है, तो उसके लिए असंभव भी संभव बन जाता है। असफलता वास्तव में अंत नहीं होती; बल्कि वह केवल नए आरंभ का संकेत होती है।
एक गांव में एक मूर्तिकार था, जो एक बड़े पत्थर से भगवान की मूर्ति बनाना चाहता था। कई दिनों तक छैनी-हथौड़ा चलाता रहा, पर पत्थर टस से मस नहीं हुआ। थककर उसने हथौड़ा नीचे रख दिया और कहा — 'शायद यह पत्थर मेरे बस का नहीं।' तभी वहां से गुजर रहे एक बूढ़े किसान ने मुस्कुराकर कहा — 'बेटा, एक बार और कोशिश कर।' मूर्तिकार ने अनमने भाव से हथौड़ा उठाया और आखिरी चोट की। उसी क्षण पत्थर दो हिस्सों में बंट गया, और भीतर से सुंदर मूर्ति उभर आई।
बूढ़ा किसान मुस्कुराया — 'बेटा, वह आखिरी चोट नहीं, बल्कि तेरी हर चोट ने यह पत्थर तोड़ा है। फर्क बस इतना है कि तू बीच में ही रुक गया था।'
यह छोटी-सी कहानी जीवन का बड़ा सत्य सिखाती है — हार आखिरी प्रयास के बाद नहीं, बल्कि कोशिश छोड़ देने के बाद होती है। हर प्रहार, हर मेहनत और हर धैर्य एक दिन फल अवश्य देता है। सफलता कभी एक झटके में नहीं आती; वह तो हर दिन के छोटे-छोटे प्रयासों का परिणाम होती है। इसलिए जब हालात कठिन हों, तो यह मत सोचिए कि सब खत्म हो गया; बल्कि यह सोचिए कि शायद अब वह समय आ गया है जब सब कुछ बदलने वाला है।
विश्वास कोई दिखने वाली चीज नहीं, लेकिन यह जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। जब मन में विश्वास होता है, तो हर अंधेरा उजाले में परिवर्तित जाता है। जो व्यक्ति खुद पर भरोसा रखता है, उसकी मंजिलें खुद उसे पहचान लेती हैं। कठिनाइयां केवल तब तक बड़ी लगती हैं जब तक हम उनका सामना करने की हिम्मत नहीं जुटाते। जैसे ही मन दृढ़ होता है, परिस्थितियां खुद कमजोर पड़ जाती हैं।
जीवन की सुंदरता इसी में है कि हम हर बार गिरने के बाद खुद को फिर उठाना सीखें। जो व्यक्ति मुस्कुराकर आगे बढ़ता है, वही सच्चा विजेता कहलाता है। जब भीतर विश्वास जागता है, तो इंसान की सीमाएं मिटने लगती हैं। ईश्वर भी उसी का साथ देते हैं, जिसे स्वयं पर भरोसा होता है। इसलिए जब परिस्थितियां प्रतिकूल हों, तो सबसे पहले अपने मन से कहिए—'मुझे यकीन है, मैं कर सकता हूं।'
जीवन में कई बार हालात इतने कठिन हो जाते हैं कि लगता है सब खत्म हो गया है। पर सच तो यह है कि वही क्षण हमारी छिपी हुई शक्ति को जगाने का अवसर होता है। याद रखिए—विश्वास वह चाबी है जो बंद दरवाज़ों को भी खोल देती है। जब आप खुद पर भरोसा कर लेते हैं, तो दुनिया की कोई ताकत आपको रोक नहीं सकती।
बस एक बार अपने भीतर की आवाज़ को सुनिए, जो कहती है—'रुकना मत।' जिस व्यक्ति के दिल में विश्वास जीवित रहता है, जीवन उसके लिए हमेशा नए आरंभ के द्वार खोल देता है। वही व्यक्ति अंत में अपने चमत्कार स्वयं रचता है।