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पहाड़ों की गोद में कसोली

कसोली
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शिमला से 77 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कसोली सुंदर नगरी है जोकि 19 वीं सदी में बनाया गया था। अँग्रेजों के समय में बनाई गई इमारतें, भवन, प्राचीन दुकानें एवं बगीचे अभी भी जीवंत हैं। कसोली के आसपास स्थित हिमालय के पेड़ एवं पौधे खूबसूरती बिखेरते हुए नजर आते हैं।

कसोली के मुख्य आकर्षण के केंद्र -

मॉन्की पाइंट
कसोली से 4 किलोमीटर की दूरी पर मॉन्की पॉइंट स्थित है। चंडीगढ़ क्षेत्र में स्थित एवं सतलुज नदी के पास एक मार्ग है जहाँ से गुजर सकते हैं। यहाँ एक पहाड़ पर स्थित है हनुमानजी का मंदिर।

मान्यता है कि हनुमानजी जब हिमालय से संजीवनी जड़ी बूटी लेकर आ रहे थे। तब हनुमानजी ने इस पहाड़ की चोटी पर अपना कदम रखा था और उनके चरण चिन्ह यहाँ पर उभरे थे।

क्राइस्ट गिरिजाघर

कसौली में एक प्रसिद्ध अँग्रेजों के जमाने में बनाया गया ‍गिरिजाघर है। इसे सन् 1844 में बनाया गया था।

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दागशाई

कसौली से 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दागशाई हरियाली एवं प्राकृतिक सुंदरता से ओतप्रोत है। जंगल में पेड़, वृक्षों के बीच पक्षी कलरव करते हैं। दागशाई की सुदंरता देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध एवं विस्मित रह जाते हैं

कैसे पहुँचें -

हवाई जहाज - कसौली से सबसे नजदीक हवाई अड्डा है चंडीगढ़। सोलन के पास स्थित शिमला बहुत ही नजदीक है।

रेल - हरियाणा में स्थित कालका सबसे नजदीक रेल मार्ग है। जोकि कसौली से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सोलन से 44 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

राजमार्ग - सोलन एवं कसौली के लिए बस सेवाएँ यहाँ पर उपलब्ध हैं। चंडीगढ़ एवं दिल्ली से टैक्सी लेकर वहाँ पहुँच सकते हैं


वहाँ पर इतनी ठंड़ पड़ती है कि ठंड़ में ऊनी व गर्म कपड़े पहनने पड़ते है। गर्मियों के समय में हल्की ठंड़ रहती है।