Mother's Day पर निदा फाज़ली की कविता : बेसन की सोंधी रोटी

Mothers Day 2020
Mothers Day Poem
- निदा फाज़ली

बेसन की सोंधी रोटी पर
खट्‍टी चटनी-जैसी मां
याद आती है चौका-बासन
चिमटा, फुकनी-जैसी मां

बान की खुरीं खाट के ऊपर
हर आहट पर कान धरे
आधी सोई आधी जागी
थकी दोपहरी-जैसी मां

चिडि़यों की चहकार में गूँज़े
राधा-मोहन, अली-अली
मुर्गे की आवाज़ से खुलती
घर की कुण्डी-जैसी मां

बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन
थोड़ी-थोड़ी-सी सब में
दिन भर इक रस्सी के ऊपर
चलती नटनी -जैसी मां

बांट के अपना चेहरा, माथा
आँखें जाने कहाँ गईं
फटे पुराने इक अलबम में
चंचल लड़की-जैसी मां।



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