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दतिया उपचुनाव में सीट बचाने में सफल रही कांग्रेस, भितरघात ने बीजेपी का हार की लिखी पटकथा

BJP's defeat in the Datia by-election; BJP's defeat in the Datia by-election due to internal sabotage; reasons for the defeat in the Datia by-election; internal sabotage by Narottam's supporters in Datia.
प्रतिष्ठा की लड़ाई वाले दतिया उपचुनाव में कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल हो गई है। उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हरा दिया है। अगर 2023 के विधानसभा चुनाव की बात करें तब कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने बीजेपी उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से चुनाव हराया था। ऐसे में भाजपा ने पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया वहीं इस बार उपचुनाव में बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया था लेकिन पार्टी को फिर भी हार का सामना करना पड़ा, हलांकि हार का अंतर जरूर कुछ कम हो गया और कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल हो गई।

दतिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार का बड़ा कारण पार्टी में जमकर भितरघात होना रहा। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद दतिया की सड़कों पर जिस तरह से उनके समर्थकों ने बवाल काटा, उसने उपचुनाव में बीजेपी की हार की पटकथा लिखना शुरु कर दिया था। इसके बाद बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में जिस तरह से मंच पर नरोत्तम मिश्रा रोएं और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी  को चुनाव में उठाना पड़ा।

चुनाव परिणाम के नतीजे बताते हैं कि बीजेपी को नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ के साथ दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह के पोलिंग बूथ पर भी कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा, यह इस बात का साफ इशारा है कि चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ जमकर भितरघात हुआ।

चुनाव नतीजों के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने कहा कि जो भितराघाती है और जो भाजपा को मां कहते है और फिर ऐसा मजाक करते है, उनको  सोचना  चाहिए। आशुतोष तिवारी ने हार की समीक्षा करने की बात कही।

दतिया से खुलकर टिकट की दावेदारी करने वाले नरोत्तम मिश्रा के रोने का वीडियो जिस तरह से वोटिंग के ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के द्वारा वायरल किया गया और चुनाव में ‘बीजेपी को सबक सिखाने’ और ‘दादा के आंसुओं का बदला लेने’ के कमेंट किए गए उसने चुनाव में बीजेपी को हराने का काम किया।  

दतिया में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के साथ बीजेपी के जिला पदाधिकारी अलग-थलग दिखाई पड़े और उन्होंने एक तरह से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के विरोध में काम किया और अपने घर बैठ गए। दतिया बीजेपी जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी के साथ बीजेपी के पार्षद एक तरह से पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नदारद रहे। दतिया के शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में स्थानीय कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और अंदरूनी असंतोष की चर्चा लगातार होती रही। जिसका असर मतदान पर भी पड़ा और 2023 के तुलना में करीब 9 फीसदी कम मतदान हुआ।

वहीं चुनावी नतीजों में जिस तरह बीजेपी को शहर की पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा इससे साफ है कि व्यापारियों  और शहर में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने आशुतोष तिवारी की जगह कांग्रेस के लिए मतदान किया और शहर में कांग्रेस प्रत्याशी धनश्याम सिंह को ऐसी लीड मिली जिसको अंत में बसई में अच्छा प्रदर्शन करके भी बीजेपी नहीं पाट पाई।

राजनीतिक विश्लेषक इस बात को साफ तौर पर मानते है कि दतिया विधानसभा चुनाव के परिणाम जिस तरह से आए वह पार्टी के लिए आत्मचिंतन का विषय है। अगर बीजेपी समय रहते भितरघात पर काबू कर लेती और तो नतीजे बीजेपी के पक्ष में बेहतर हो सकते थे। बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी जिस तरह से चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह का बूथ हार गए, उसके एक नहीं कई सियासी मायने है। दतिया में भाजपा की हार सिर्फ पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की हार नहीं बल्कि जिला भाजपा भाजपा संगठन के भितरघात का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है।

इसके साथ दतिया उपचुनाव के नतीजे यह भी बताते है कि बीजेपी को शहर में हार का सामना करना पड़ा, जबकि शहरी वोटर्स बीजेपी का कोर वोटर्स माना जाता है, ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है। जबकि ग्रामीण इलाकों में बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया और उन पोलिंग बूथ पर बीजपी को जीत हासिल हई जो वह लगातार हारती आ रही थी। इसके साथ ही बसई मंडल जहां पर भाजपा पिछला चुनाव हार गई थी वहां पर इस पर 3 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। गौरतलब है कि बसई में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा हुई थी और अब चुनाव नतीजे बताते है कि बसई ने भाजपा का साथ दिया। 
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भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
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