नरबलि! 2 पत्नियों के साथ बेटे की चाह में मासूम को मरने तक सुई से गोदता रहा नरपिशाच!
एक दिल दहला देने वाले मामले में तन्त्रक्रिया के नाम पर कर डाली एक मासूम की निर्ममता से हत्या। गौतमपुरा स्थित गढ़ी बिल्लौद गांव में हुए दो साल के बच्चे की हत्या का पुलिस ने सवा माह बाद सोमवार को खुलासा किया। बेटा नहीं होने पर पड़ोसी ने ही कथित तांत्रिक के बहकावे में आकर मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया। पूर्णिमा की रात उसे सुइयां चुभोई और दम घोंटकर उसकी बलि दे दी। इस नृशंस हत्याकांड में पुलिस ने हत्यारे पड़ोसी और उसकी दो पत्नियों को गिरफ्तार कर लिया।
बेटे की चाह में तांत्रिक द्वारा बताई गई पूजा के अनुसार उसने दो साल के बच्चे को रेत पर लेटा दिया। उसके गर्दन व मुंह में सुई चुभोना शुरू की। जब वह रोने लगा तो पुष्पा व संतोष ने मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। उसका मुंह भी दबा दिया। जब मौत हो गई तो उसे आंगन में एक टाट के बोरे में लपेटकर सो गए।पुलिस के मुताबिक 9 जून की शाम 6 बजे दो साल का यश घर के आंगन में खेलते-खेलते गायब हो गया था। कुछ देर जब वह नहीं मिला तो यश के परिजन ने उसे ढूंढना शुरू किया। काफी खोजबीन के बाद भी पता नहीं चला तो पिता सुनील ने पुलिस को शिकायत की। 10 जून को पड़ोसी दिलीप बागरी के आंगन में यश की लाश मिली।
पुलिस ने शक के बिना पर दिलीप से पूछताछ की। दिलीप ने एक-दो नहीं कई बार पुलिस को गुमराह किया। पुलिस को बार-बार पूछताछ के बाद दिलीप को छोड़ना पड़ा था। बाद में पुख्ता सबूत मिलने पर दिलीप पर सख्ती बरती गई। इस पर उसने कबूल कर लिया कि दो पत्नियों पुष्पा और संतोष के साथ मिलकर हत्या की है।विनोद ने तीन शादियां की है। पहली पत्नी से उसे दो बेटियां है। 11 साल पहले डिलेवरी के दौरान पत्नी की मौत हो गई थी। बेटे की चाह में विनोद ने तीसरी शादी (नातरा) नागदा जंक्शन की संतोष से की। लेकिन वह भी मां नहीं बन पाई। संतोष के लिए उसने कई डॉक्टर को दिखाने के साथ ही तंत्र-मंत्र का भी सहारा लिया।
तांत्रिक ने दी थी बलि की सलाह: संतोष जब मायके पहुंची तो वहां परिजन उसे कथित तांत्रिक गोवर्धन बागरी के पास ले गया। बागरी ने तंत्र साधना के साथ एक बच्चे की बलि देने के लिए कहा। बागरी ने संतोष को कहा था कि वह किसी दंपती के बड़े बेटे की बलि अमावस्या व पूनम की रात दे तो उन्हें बेटा पैदा होगा।इस पर दिलीप और उसकी दोनों पत्नियों ने पड़ोसी सुनील के बेटे यश की अपहरण की योजना बनाई।
9 जून को पूनम थी। उन्होंने इसी दिन वारदात को अंजाम दिया। दिलीप सुबह गांव से बाहर चला गया और उसकी दोनों पत्नियों ने यश को आंगन से अगवा कर लिया।रात को दिलीप जब पहुंचा तो वह गांव वालों के साथ बच्चे को ढूंढने लगा। उसके बाद रात को घर पहुंचा और दोनों पत्नियों के साथ मिलकर तंत्र साधना की।