सच्चा प्रेम ''भूत'' की तरह!
फ्रेग मार्क ने कहीं कहा था कि ''सच्चा प्रेम भूत की तरह है, चर्चा उसकी सब करते हैं, देखा किसी ने नहीं।'' कहते हैं कि प्यार किया नहीं जाता हो जाता है। कैसे? ऑटो जनरेट है क्या?
अमेरिकी पत्रिका 'सायकोलॉजी टुडे' के संपादक रोबर्ट एप्सटेन ने कभी कहा था कि उन्होंने एक ऐसी प्रक्रिया तैयार की है, जिसमें छह महीनों में एक-दूसरे के प्रति प्यार पैदा किया जा सकता है। दूसरी ओर अगर यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल की डॉ. लेसेल डॉसन के शोध पर आपने विश्वास किया तो आपको हैरानी होगी। उनका कहना है कि दुनिया में प्यार एक बीमारी है और इस बीमारी का इलाज सिर्फ सेक्स है।
रूस की ड्यूक यूनिवर्सिटी में सम्मोहन के प्रयोग चलते थे। उनका मानना है कि जो बात व्यक्ति के आत्मसम्मान से जुड़ी है उसे छोड़कर सम्मोहन की अवस्था में उससे हर कार्य कराया जा सकता है। मसलन किसी भी व्यक्ति के मन में किसी के भी प्रति प्रेम जाग्रत किया जा सकता है। चाहे वह दुनिया की सर्वाधिक काली लड़की हो, लेकिन सम्मोहनकर्ता उसे इस बात का विश्वास दिला देगा कि वही लड़की तेरे लिए बनी है।
खैर, ऐसे कई शोध आते हैं फिर उनका खंडन करने के लिए नए शोध आ जाते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या 'सच्चा प्रेम' करना या होना सचमुच ही मुश्किल है। लड़का क्या देखता है? शायद एक सुंदर चेहरे या फिगर वाली लड़की। लड़की देखती है चौड़े कंधे, दिलेरी और शायद मोटी जेब। ऐसा कहना भी मुश्किल है, क्योंकि यह तय होता है, किसी देश के प्रचलन, संस्कृति और सामाजिक मान्यताओं अनुसार। तब क्या प्यार भी बँधा है फैशन और परम्परा से?
अफ्रीका में एक समय यह प्रचलन था कि मोटे होंठों वाली लड़की बहुत सेक्सी होती है। उसी से प्रेम या विवाह करना चाहिए। इस धारणा के चलते लड़कियों ने अपने होंठों को मोटा करना शुरू कर दिया था। कई जगह इसके ठीक विपरीत प्रचलन है। आमतौर पर लड़का देह देखकर ही लड़की को पसंद करता है और लड़की इसके अलावा भी कुछ और देखती होगी, लेकिन वह भी संसार से जुड़ी बातें ही रहती हैं। शहरी बाबू और गाँव के प्रेमी में से लड़की को चयन करना हो तो शायद शहरी बाबू के लिए वोटिंग ज्यादा होगी। यही बात लड़के पर भी लागू होगी।
तब फिर सच्चा प्रेम किसे कहें? फिल्मों में तो सच्चे प्रेम की बहुत दास्तानें बताई जाती हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा कम ही देखने में आता है कि किसी प्रेमी ने प्रेमिका के लिए या किसी प्रेमिका ने प्रेमी के लिए हीर-राँझा या सिरी-फरहाद जैसा काम किया हो। कभी-कभी सोचने में आता है कि इन पुराने प्रेमी-प्रेमिकाओं ने एक-दूसरे में क्या देखकर प्रेम किया होगा? क्या यह भी मनोविज्ञान की उन सारी हदों में आते हैं जिसे कि एक बीमारी कहा गया है?
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रूस की ड्यूक यूनिवर्सिटी में सम्मोहन के प्रयोग चलते थे। उनका मानना है कि जो बात व्यक्ति के आत्मसम्मान से जुड़ी है उसे छोड़कर सम्मोहन की अवस्था में उससे हर कार्य कराया जा सकता है। मसलन किसी भी व्यक्ति के मन में किसी के भी प्रति प्रेम जाग्रत किया जा सकता है। चाहे वह दुनिया की सर्वाधिक काली लड़की हो, लेकिन सम्मोहनकर्ता उसे इस बात का विश्वास दिला देगा कि वही लड़की तेरे लिए बनी है।
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अफ्रीका में एक समय यह प्रचलन था कि मोटे होंठों वाली लड़की बहुत सेक्सी होती है। उसी से प्रेम या विवाह करना चाहिए। इस धारणा के चलते लड़कियों ने अपने होंठों को मोटा करना शुरू कर दिया था। कई जगह इसके ठीक विपरीत प्रचलन है। आमतौर पर लड़का देह देखकर ही लड़की को पसंद करता है और लड़की इसके अलावा भी कुछ और देखती होगी, लेकिन वह भी संसार से जुड़ी बातें ही रहती हैं। शहरी बाबू और गाँव के प्रेमी में से लड़की को चयन करना हो तो शायद शहरी बाबू के लिए वोटिंग ज्यादा होगी। यही बात लड़के पर भी लागू होगी।
तब फिर सच्चा प्रेम किसे कहें? फिल्मों में तो सच्चे प्रेम की बहुत दास्तानें बताई जाती हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा कम ही देखने में आता है कि किसी प्रेमी ने प्रेमिका के लिए या किसी प्रेमिका ने प्रेमी के लिए हीर-राँझा या सिरी-फरहाद जैसा काम किया हो। कभी-कभी सोचने में आता है कि इन पुराने प्रेमी-प्रेमिकाओं ने एक-दूसरे में क्या देखकर प्रेम किया होगा? क्या यह भी मनोविज्ञान की उन सारी हदों में आते हैं जिसे कि एक बीमारी कहा गया है?

