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प्यार एक पवित्र अहसास
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प्यार' यह एक पवित्र शब्द है और पावनता का संचार करता है। इस शब्द के गहरे अर्थ को कच्ची उम्र तक समझ पाना मुश्किल होता है। लेकिन होने का दावा लगभग सभी करते हैं। हम प्यार को लड़के और लड़की के मध्य सिर्फ दोस्ती के दायरे तक सिमटा मानते हैं।प्यार का अर्थ वह तो नहीं जो मात्र एक दिन के नाम पर दर्शाया जाये, प्यार वह भी नहीं जो आज के युवा दर्शा रहे हैं। प्यार तो लेने से अधिक देने का नाम है, प्यार तो दिखाने से अधिक महसूस करने का नाम है, प्यार देह से अधिक आत्मा से एहसास करने का नाम है।कॉलेज जीवन में आकर अपने युवा होने का अहसास जड़ें जमा चुका था। दिल का धड़कना जैसे महसूस होने लगा था। प्यार होता क्या है इसे जाने-समझे बिना लगने लगा कि हमें अमुक व्यक्ति से प्यार हो गया है। पैर धरती पर नहीं टिकते थे और आँखों में सदा प्रेयसी का ही चेहरा दिखाई देता था।वर्तमान में प्यार के नाम पर होते आ रहे आयोजनों को देखकर लगता है कि क्या यह टाइम पास कर रहे हैं या फिल्मी कहानियों को देखकर खेल-तमाशा कर रहे हैं।आज कितनी लड़कियां किसी बेरोजगार लड़के से या घर की कमजोर आर्थिक स्थिति वाले लड़के से कदम से कदम मिलाकर साथ चलने को तैयार होंगी। या लड़के किसी दुर्घटना का शिकार होने पर भी लड़की का साथ देने को तैयार होगा। उसकी हर मुसीबत में हाथ बँटाएगा। रंग-रूप और सुविधाओं से इतर भी कोई चीज देखी है। यह सवाल इन्हें खुद से पूछना चाहिए। इस पर विचार करना चाहिए। लैला-मजनू, रोमियो-जूलियट, सोहनी-महिवाल की जगह लेने की अपेक्षा तो कोई भी नहीं करता लेकिन इन रिश्तों में गंभीरता का होना बहुत जरूरी है। (वेबदुनिया डेस्क)