1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. मंच अपना

प्रतीक्षा

प्रतीक्षा शैफाली शर्मा
- शैफाली शर्मा

SubratoND
मैं अपने ही जीवन की मूक दर्शक
अक्सर देखती हूँ
समय को अपने पास से गुज़रते हुए
और जाते हुए एक और दिन को

उसी तरह नीरस और निर्जीव
जैसे तुम अक्सर निकल जाते हो
मेरे करीब से
और मैं खड़ी रह जाती हूँ
उस पल की प्रतीक्षा में

जो जीवित कर जाए
उम्र के उस हिस्से को
जो निर्जीव
हो चुका है
मेरे हृदय की तरह..