1. समाचार
  2. व्यापार
  3. समाचार
  4. India-EU Free Trade Agreement Update Ursula von der Leyen hints at historic trade deal at Davos
Last Modified: दावोस , मंगलवार, 20 जनवरी 2026 (20:28 IST)

EU के साथ भारत का FTA क्यों है खास और ट्रंप और चीन को कैसे लगेगा बड़ा झटका, राह में अभी कौनसी अड़चनें

ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 50% और यूरोपीय संघ के सामानों पर 10-25% तक टैक्स लगाने की धमकी दी है। ऐसे में भारत और ईयू का एक-दूसरे के करीब आना ट्रंप की 'ब्लैकमेलिंग' वाली व्यापार नीति को कमजोर करेगा।

India-EU Free Trade Agreement
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक में एक बड़ा संकेत देते हुए कहा कि यूरोपीय संघ (EU) और भारत लंबे समय से प्रतीक्षित 'मुक्त व्यापार समझौते' (FTA) को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। उन्होंने इसे एक ऐसी 'ऐतिहासिक सफलता' बताया जो आने वाले वर्षों में दोनों अर्थव्यवस्थाओं की सूरत बदल सकती है। उनके इस बयान से डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नींद उड़ गई होगी। चीन और डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति- दोनों के लिए यह समझौता एक बड़े कूटनीतिक झटके की तरह देखा जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप और चीन के लिए बड़ा झटका

ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 50% और यूरोपीय संघ के सामानों पर 10-25% तक टैक्स लगाने की धमकी दी है। ऐसे में भारत और ईयू का एक-दूसरे के करीब आना ट्रंप की 'ब्लैकमेलिंग' वाली व्यापार नीति को कमजोर करता है। अगर भारतीय सामान (जैसे कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, और फार्मा) यूरोपीय बाजारों में बिना शुल्क के पहुंचेंगे, तो वे चीनी उत्पादों को कड़ी टक्कर देंगे। इससे यूरोपीय बाजारों में चीन का वर्चस्व कम होगा। समझौते से ईयू और भारत दोनों की अमेरिकी बाजार पर निर्भरता घटेगी। यूरोपीय निवेश भी चीन से निकलकर भारत की ओर मुड़ेगा।

किन क्षेत्रों में खुलेंगी अपार संभावनाएं

यूरोपीय संघ भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। इस डील से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को यूरोप के 27 देशों के बाजारों में सीधी पहुंच मिलेगी। भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन लगभग एक दशक तक यह ठंडे बस्ते में रही। 2022 में इसे फिर से पुनर्जीवित किया गया। 2023 में दोनों पक्षों के बीच वस्तु व्यापार 124 बिलियन यूरो (लगभग 11 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच गया है। एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि समझौते के बाद क्लीन एनर्जी, फार्मास्यूटिकल्स और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं खुलेंगी।
 

वॉन डेर लेयेन ने कहा- सभी सौदों की जननी

अपने संबोधन में वॉन डेर लेयेन ने कहा कि अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की कगार पर हैं। कुछ लोग इसे 'सभी सौदों की जननी' (Mother of all deals) कह रहे हैं। यह समझौता 2 अरब लोगों का एक साझा बाजार तैयार करेगा, जो वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा।

अगले हफ्ते भारत दौरे पर आएंगी वॉन डेर लेयेन

इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अगले सप्ताह उर्सुला वॉन डेर लेयेन का भारत दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनयिकों को उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान राजनीतिक स्तर पर सबसे विवादास्पद मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा, जिससे इस महीने के अंत में होने वाली भारत-यूरोपीय संघ शिखर बैठक में बड़ी घोषणा का रास्ता साफ हो सके।
 

क्या हैं समझौते के मायने 

यह प्रस्तावित समझौता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को नया आकार देने की क्षमता रखता है। वर्तमान भू-राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए इसके मायने और बढ़ जाते हैं। यूरोपीय संघ के लिए भारत एक विश्वसनीय भागीदार है, जो चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की रणनीति में फिट बैठता है।
 

किन बातों की आ रही हैं अड़चनें

यूरोपीय संघ चाहता है कि भारत ऑटोमोबाइल, वाइन और स्पिरिट (शराब) पर आयात शुल्क कम करे। भारत अब तक अपने घरेलू प्रोडक्ट्‍स को बचाने के लिए इन पर सुरक्षात्मक रुख अपनाता रहा है।  भारत अपने आईटी और अन्य कुशल पेशेवरों के लिए यूरोप में आसान वीजा और मोबिलिटी नियमों की मांग कर रहा है। स्थिरता मान और सार्वजनिक खरीद तक पहुंच जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों पर भी बातचीत जारी है। Edited by : Sudhir Sharma
ये भी पढ़ें
Toll Tax के नए Rules, इन गाड़ियों को नहीं मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट-NOC, आपके लिए जानना बेहद जरूरी