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Last Modified: नई दिल्ली , मंगलवार, 20 जनवरी 2026 (19:39 IST)

कसाब ने कोर्ट की अवमानना नहीं की लेकिन आपके क्लाइंट ने की, मेनका गांधी को लेकर Supreme Court की तल्ख टिप्पणी

Supreme Court slams Maneka Gandhi in stray dogs case
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी द्वारा आवारा कुत्तों के मुद्दे पर दिए गए बयानों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मेनका गांधी ने 'अदालत की अवमानना' की है। 
 
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मेनका गांधी ने बिना सोचे-समझे व्यापक टिप्पणियां कीं और ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने इस प्रक्रिया में 'हर किसी' पर हमला बोला। हालांकि जजों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी 'उदारता' दिखाते हुए उनके खिलाफ फिलहाल अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं कर रहे हैं।
 

जजों ने लहजे और आचरण पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान पीठ ने मेनका गांधी के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से पूछा कि क्या उन्होंने गांधी का वह पॉडकास्ट सुना है और उनकी 'बॉडी लैंग्वेज' (हाव-भाव) पर गौर किया है?  न्यायमूर्ति नाथ ने वकील से कहा कि जहां एक ओर वे कोर्ट से अपनी टिप्पणियों में संयम बरतने को कह रहे हैं, वहीं गांधी के खुद के बयान मर्यादा से कोसों दूर थे। पीठ ने कहा कि उन्होंने बिना सोचे-समझे सभी के खिलाफ हर तरह की टिप्पणी की है, जो उनके गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को दर्शाता है।
 
 न्यायमूर्ति मेहता ने यह भी सवाल उठाया कि एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए बजट आवंटन या नीतिगत समर्थन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए थे?  जवाब में वकील रामचंद्रन ने कहा कि बजट आवंटन एक नीतिगत मामला है। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि उन्होंने 26/11 के मुंबई हमलों के दोषी आतंकी अजमल कसाब का भी प्रतिनिधित्व किया था।  इस पर न्यायमूर्ति नाथ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अजमल कसाब ने अदालत की अवमानना नहीं की थी, लेकिन आपकी क्लाइंट ने की है। 
 

आवारा कुत्तों पर बहस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कुत्ता खिलाने वालों (डॉग फीडर्स) को जवाबदेह ठहराने वाली उसकी पिछली टिप्पणी कोई व्यंग्य नहीं थी, बल्कि अदालत में चर्चा के दौरान गंभीरता से कही गई बात थी।  गौरतलब है कि 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह कुत्ता काटने की घटनाओं में राज्यों को भारी मुआवजा देने का निर्देश दे सकता है। 
 
साथ ही कोर्ट ने ऐसी स्थितियों में 'फीडर्स' को भी जवाबदेह बनाने पर विचार करने की बात कही थी। अदालत ने पिछले 5 वर्षों से आवारा पशुओं के नियमों के लागू न होने पर चिंता जताते हुए इसे नियामक विफलता और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। मामले की सुनवाई अभी जारी है। Edited by : Sudhir Sharma
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