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कंपनियों का सीएसआर व्यय बढ़ेगा

Company law
नई दिल्ली। ज्यादातर कंपनियों का मानना है कि अगले वित्त वर्ष में सामाजिक कल्याण गतिविधियों में ज्यादा खर्च किया जाएगा क्योंकि सीएसआर (कंपनी सामाजिक दायित्व) रणनीतिक निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। एक सर्वे में यह कहा गया है।
 
हालांकि उद्योग मंडल फिक्की के सर्वे में यह भी कहा गया है कि कंपनियों में कानून तथा कर संबंधी नियमनों के साथ अन्य कारकों को लेकर स्पष्टता का अभाव है और यह कंपनी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत आने वाली परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के रास्ते में बाधा है।
 
कंपनी कानून, 2013 के तहत निश्चित शर्तों को पूरा करने वाली लाभ कमा रही कंपनियों को अपने तीन साल के औसतन शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों में खर्च करना है। यह नियम अप्रैल 2014 में प्रभाव में आया।
 
फिक्की ने कहा कि भाग लेने वाली 83 प्रतिशत कंपनियों ने उम्मीद जताई कि 2016-17 में सीएसआर खर्च बढ़ेगा। सर्वे में कहा गया है, जहां 6 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इसमें कमी की आशंका जताई वहीं 9 प्रतिशत ने कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। शेष 2 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उन्होंने पहली बार अपने बजट में सीएसआर मद में आबंटन किया है। 
 
यह सर्वे जनवरी और फरवरी में 150 कंपनियों के बीच किया गया। इसमें भाग लेने वालों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, निजी कंपनियां तथा विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों का कारोबार 1.7 करोड़ रुपए से लेकर 75,000 करोड़ रुपए के बीच है।
 
सर्वे में शामिल 77 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि 2014-15 में 2013-14 के मुकाबले उनका सीएसआर बजट बढ़ा है। इसके अनुसार कानून एवं कर संबंधी नियमनों को लेकर स्पष्टता का अभाव तथा अन्य कारण कंपनियों के लिए सीएसआर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा है। (भाषा)