बृहस्पति के सबसे बड़े चांद की NASA के Juno ने जारी की तस्वीर, जानिए कितने हैं चंद्रमा

Last Updated: बुधवार, 9 जून 2021 (15:36 IST)
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के जूनो स्पेसक्रॉफ्ट ने (बृहस्पति) के सबसे बड़े चांद की जारी की है। बताया जा रहा है कि यह हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा चंद्रमा है। इसका नाम है गैनीमेड। नासा के जूनो की 7 जून, 2021 की पहली दो फोटो बृहस्पति के विशाल चंद्रमा की फ्लाईबाई से हासिल हुई है।

1. गैनीमेड का व्यास 5,268 किमी का बताया जा रहा है, जो कि बुध ग्रह से भी 8% बड़ा है। इसका द्रव्यमान भी के सारे चंद्रमाओं में सबसे ज्यादा है और पृथ्वी के चन्द्रमा का 2.2 गुना है।

2. सतह के करीब 1,000 किमी की दूरी पर घूमते हुए नासा के जूनो अंतरिक्ष यान ने सौर मंडल के सबसे बड़े चंद्रमा गैनीमेड का दौरा किया।

3. दो दशकों के बाद यानी करीब 21 साल से बाद जूनो स्पेसक्राफ्ट ने चंद्रमा की हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरों को पृथ्वी पर भेजा है।

4. जो तस्वीरें सामने आई है उसमें क्रेटर और टेक्टोनिक के चित्र सहित कई सतही विशेषताओं पर फोकस करती हैं।

5. जुपिटर ऑर्बिटर के जूनोकैम इमेजर और स्टेलर रेफरेंस यूनिट स्टार कैमरे से ली गई फोटो चंद्रमा के क्रेटर, स्पष्ट रूप से अलग अंधेरे और उज्ज्वल इलाके और लंबी संरचनात्मक विशेषताएं संभवतः टेक्टोनिक दोषों से जुड़ी हुई हैं।

6. नासा ने कहा कि अंतरिक्ष यान पानी से घिरे चंद्रमा के लगभग पूरे हिस्से को कवर करने में कामयाब रहा है।

7. नासा के वैज्ञानिक अब चंद्रमा का एक रंगीन फोटो बनाने का काम करेंगे, जो बुध ग्रह से भी बड़ा है। तस्वीरों को लेकर जूनो के प्रिंसिपल इनवेस्टिगेटर स्कॉट बोल्टन ने कहा कि यह एक पीढ़ी में इस विशाल चंद्रमा के लिए किसी भी अंतरिक्ष यान के सबसे करीब है।

8. ग्रीक मायथोलॉजी के अनुसार बृहस्पति की पत्नी और देवी जूनो के नाम पर जूनो स्पेसक्राफ्ट को नासा ने 2011 में लॉन्च किया गया था, जिसके बाद यह 2016 में तक पहुंचा था। बृहस्पति की कक्षा में आने के बाद से अंतरिक्ष यान अपने घने बादल कवर के माध्यम से ग्रह की उत्पत्ति और विकास को समझने की कोशिश कर रहा है।

9. बृहस्पति ग्रह या कहें कि गुरु ग्रह हमारे सौर मंडल का पांचवा सबसे बड़ा ग्रह है। सौरमंडल में सूर्य के आकार के बाद बृहस्पति का ही नम्बर आता है। पृथ्‍वी से बहुत दूर स्थित इस ग्रह का व्यास लगभग डेढ़ लाख किलोमीटर और सूर्य से इसकी दूरी लगभग 778000000 किलोमीटर मानी गई है।

यह 13 कि.मी. प्रति सेकंड की रफ्तार से सूर्य के गिर्द 11 वर्ष में एक चक्कर लगा लेता है। यह अपनी धूरी पर 10 घंटे में ही घूम जाता है। लगभग 1300 धरतियों को इस पर रखा जा सकता है। जिस तरह सूर्य उदय और अस्त होता है, उसी तरह बृहस्पति जब भी अस्त होता है तो 30 दिन बाद पुन: उदित होता है। उदित होने के बाद 128 दिनों तक सीधे अपने पथ पर चलता है। सही रास्ते पर अर्थात मार्गी होने के बाद यह पुन: 128 दिनों तक परिक्रमा करता रहता है एवं इसके पश्चात्य पुन: अस्त हो जाता है। गुरुत्व शक्ति पृथ्वी से 318 गुना ज्यादा।

10. हमारी पृथ्‍वी के तो एक ही चंद्रमा है लेकिन बृहस्पति के लगभग 79 चंद्रमा है। बृहस्पति ग्रह के चारों ओर चक्कर लगाने वाले जिन नए चंद्रमाओं का पता चला है उनका आकार अपेक्षाकृत छोटा है। सौरमंडल के पांचवें ग्रह बृहस्पति के पास कई विशाल चंद्रमा भी हैं। इनमें गानीमेडे, गेनीमेड या गैनीमेड तो पूरे सौमंडल में सबसे बड़ा है। हाल ही में अमेरिकी रिसर्चरों ने 12 चंद्रमाओं की पहचान की है इनमें से 10 का ब्योरा तो नासा को दे दिया गया है। बृहस्पति के 79 चंद्रमाओं में से अभी 26 के नाम रखे जाने बाकी हैं। इनमें 9 चांद हाल ही में ढूंढे गए 10 चांदों में से हैं।

- एजेंसी



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