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नन्ही कविता : हमजोली
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डॉ. श्रीप्रसाद, वाराणसी अगर एक कविता मैं लिख लूंतो उसको गा देना तुमअगर एक लड्डू मैं ले आऊंतो उसको खा लेना तुमअगर एक बिल्ली मैं पालूंतो तुम उसे डराना मतअगर कहीं बंदर बैठा हो तो तुम उसे चिढ़ाना मतअगर कहीं कोयल गाती होउसकी सुनना बोली तुमअगर साथ खेले कोईबनना उसके हमजोली तुम।