Hanuman Chalisa

हैप्पी न्यू ईयर पर कविता : नए साल का इंतजार

Updated: मंगलवार, 28 दिसंबर 2021 (17:09 IST)
बैश और बवाल

- ओमीश परुथी
 
इक जुनून सा तारी था हवाओं पे
नया साल है आने वाला
सबकी बेताब निगाहें
पुराने साल की नब्ज पकड़े बैठी थीं। 
किसी की आखिरी सांस का
इतनी बेसब्री से इंतजार
देखा था मैंने पहली बार।
पंच सितारा होटल, रेस्तरां व जिमखाने
नेता, अभिनेता, पार्टी-पुंगव जाने-माने
नए साल को गलबहियां डालने को थे बेकरार
कहीं बैश, कहीं बवाल।
उन्मादग्रस्त टी.वी. चैनल
पल-पल का उगल रहे थे हाल।
पुराने साल की सुन अंतिम सांस
सबकी सांस में आई सांस।
नए साल को सबने
किलकारियों, तालियों व प्यालियों
में लपक लिया
'नववर्ष हो मंगलकारी!'
'हैप्पी न्यू ईयर !' 
जाम पर जाम छलकाए गए
मूढ़ मुसद्दी लाल
देख रहा था
सुन रहा था
भीतर-भीतर गुन रहा था
ये जाम, ये डांस, ये आतिशबाजी
न होती गर, तो नया साल न आता?
किसको यह सोचना है भाता
काल की अविरल, अजस्र, प्रवहमान धारा को
किसी क्षण विशेष पर
काटा जा सकता है?
इसे नए और उसे पुराने में
बांटा जा सकता है?

ALSO READ: Hindi Essay on New Year 2022 : नववर्ष पर निबंध हिन्दी में

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

इंदौर में साहित्य की विविध विधाओं का संगम: जनवादी लेखक संघ का 150वाँ रचना पाठ संपन्न

अगला लेख