पालने में लेटे एक नन्हे से भूखे शिशु पर एक बालगीत भूख-भूख लगी, जोरों की भूख लगी। रोई-चिल्लाई भी, लोरी-सी गाई भी। हाथों से पलने की, गोटी खड़काई भी। गुस्से में चाटी है, मुट्ठी तक थूक लगी। कहां गए चेहरे सब, ओझल हैं मोहरे सब।...