फनी कविता : तितली रानी
पूर्व दिशा से उड़ती आई,
कलियों पर मंडराती है।
इन फूलों पर बैठ-बैठकर,
अपनी कला दिखाती है।
पीले-काले-लाल-बैंगनी,
पंख सुनहरे सजते हैं।
देखकर इनके रूप-रंग को,
हम बच्चे भी हंसते हैं।
अपनी झलक दिखाने हेतु,
दूर देश से आती है।
इन फूलों पर बैठ-बैठकर,
अपनी कला दिखाती है।
गगन-मगन में उड़ती रहती,
शोभा बड़ी निराली है।
प्रकृति सौंदर्य सहेजे संग में,
तितली रानी प्यारी है।
बच्चे इनको पास बुलाते,
आने में सकुचाती है।
लेखक के बारे में
शम्भू नाथ