बंदर मामा पहन पजामा, अब न जाते हैं स्कूल। करते रहे अब तलक थे वे, यूं ही व्यर्थ भूल पर भूल। खिसका कभी कमर से था तो, कभी फटा नादानी में। फटे पजामे के कारण ही, मिली आबरू पानी में। फटे पजामे के कारण ही, हंसी हुई...