क्लासरूम में होगी तकनीक से पढ़ाई
गरिमा माहेश्वरी अब कंप्यूटर,इंटरनेट, मल्टीमीडिया, ऑडियो-वीडियो और बहुत सी नई तकनीकों का प्रयोग कक्षा में बच्चों को पढ़ाने के लिए बहुत तेजी से किया जा रहा है। आज से कुछ साल पहले पढ़ने-पढ़ाने के तरीके भी कम थे और तकनीक का प्रयोग भी सीमित चीजों के लिए किया जाता था। लेकिन आज क्लासरूम में ये सारी तकनीकें बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।अब स्कूल में हर क्लास में इंटरनेट से लैस कंप्यूटर को पहुँचाने के लिए बहुत से इंतजाम किए जा रहे हैं। साथ ही इस तरह से पढ़ने में बच्चे भी बहुत रुचि दिखा रहे हैं। इसके जरिए वे अपने कोर्स से संबंधित कई ऐसी जानकारियाँ प्राप्त कर सकते हैं जो उनकी किताबों में नहीं मिलती। अब तो वायरलैस तकनीक ने इस काम को और भी आसान बना दिया है। अब स्कूल भी आराम से 'पोर्टेबल क्लासरूम' खरीद सकते हैं जिसके अंतर्गत कई लैपटापों को बिना तार के जोड़ा जा सकता है। इस तरह के नेटवर्क के माध्यम से हर विद्यार्थी एक लैपटॉप पर अपना कार्य कर सकता है।इस तरह की तकनीक को पढ़ाई के साथ उपयोग करने से बच्चों में काफी विकास और बदलाव भी देखा जा सकता है।
* छात्रों का एक्टिव रोल में आना। ज्यादातर यह देखा जाता है कि क्लास में शिक्षक के पढ़ाते समय अधिकतर बच्चों का ध्यान पढ़ाई पर नहीं होता। वे शिक्षक की बातें सुनते जरूर हैं लेकिन प्रश्न पूछने पर रिजल्ट जीरो होता है। बच्चों को एक्टिव रोल में लाने का सबसे उत्तम तरीका है इस तकनीक का प्रयोग। जब बच्चे इंटरनेट का प्रयोग करेंगे तो उनके पास जानकारियों का अथाह सागर होगा जिसकी वजह से उनकी जिज्ञासाएँ बढ़ेंगी और वे प्रश्न पूछ उसका उत्तर जानने की चेष्टा करेंगे।* इस तरह के प्रयोग से उनको बढ़ावा मिलने में भी मदद होगी साथ ही जब उन्हें कई जानकारियाँ पता होंगी तो उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होगी। जिसका सकारात्मक परिणाम उनकी पढ़ाई पर जरूर पड़ेगा। * फिलहाल इंटरनेट पर बहुत से ऐसे ग्रुप्स मौजूद हैं जहाँ पढ़ाई से संबंधित सारी समस्याएँ हल की जाती हैं। बच्चे ऐसे ग्रुप्स के संपर्क में आने से अपनी समस्याओं का हल तुरंत ढूँढ पाएँगे जिससे पढ़ाई ज्यादा अच्छे तरीके से हो पाएगी।अब मल्टीमीडिया का उपयोग भी पढ़ाई के लिए किया जाने लगा है। इस तकनीक के माध्यम से बच्चों को मनोरंजन के साथ ही बहुत सी जानकारियाँ दी जा सकती हैं।बच्चों से कोर्स से संबंधित कई विषयों पर प्रेजेंटेशन भी बनवाई जा सकती हैं जिसे फिर क्लासरूम में दिखाया व समझाया जा सकता है। तकनीक के इस तरह के प्रयोग से न केवल बच्चे पढ़ाई में ज्यादा रुचि दिखाएँगे बल्कि उनकी सोचने-समझने की शक्ति का भी विकास होगा।