आउटसोर्सिंग लोकेशन में भारत नं. 1
मैनेजमेंट कंसल्टेंसी फर्म एटी केर्नी की रिपोर्ट
मुंबई। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा भारत को आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने के बावजूद अन्य देशों की आईटी और बैंक ऑफिस कामों की आउटसोर्सिंग चाहने वाली कंपनियों के लिए भारत अब भी पसंदीदा जगह बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि कई ऐसे देशों में जहाँ राजनीतिक दलों या नेताओं द्वारा आउटसोर्सिंग के खिलाफ कड़े कदम उठाने के संकेत दिए गए हैं, वहाँ की कंपनियाँ भी खर्च में कमी के लिए भारत में आउटसोर्सिंग के विकल्प तलाश रही हैं।भारत अब भी कम कीमत, कारोबारी माहौल और कुशल कमिर्यों की प्रचुर उपलब्धता की वजह से आउटसोर्सिंग के लिए वित्तीय रूप से सबसे आकर्षक देशों की सूची में कायम है। अंतरराष्ट्रीय मैनेजमेंट कंसल्टेंसी एटी केर्नी की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे माहौल में जब दुनिया के अधिकतर देश आउटसोर्सिंग के लिए पसंदीदा क्षेत्रों की सूची में नीचे गिरते जा रहे हैं, भारत ने अपनी नंबर वन की स्थिति बरकरार रखी है और इसे पसंद करने वाले देशों की संख्या में इजाफा दर्ज किया गया है। नए देश सूची में शामिलएटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि आउटसोर्सिंग के लिए पसंदीदा देशों की सूची में कुछ नए उभरते हुए देश भी सामने आए हैं। एटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है साल 2009 के लिए दुनिया में शीर्ष सर्विसेज लोकेशन इंडेक्स (जीएसएलआई) तैयार की गई है जिसमें पहले तीन देश भारत, चीन और मलेशिया अपने स्थान पर कायम हैं। दुनिया के आर्थिक माहौल में उतार-चढ़ाव की वजह से अन्य देशों की रैंकिंग में परिवर्तन दर्ज किया गया है। आउटसोर्सिंग के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन चुनने के लिए तैयार की गई इस रिपोर्ट में कम से कम 50 देशों को शामिल किया गया। सूची से 9 देश बाहरआर्थिक संकट और डॉलर की तुलना में स्थानीय मुद्रा की कीमतों में वृद्धि की वजह से आउटसोर्सिंग के लिए पसंदीदा क्षेत्र के रूप में उभर रहे पूर्वी एवं मध्य यूरोप की रैंकिंग में गिरावट दर्ज हुई है। आउटसोर्सिंग के लिए पसंदीदा देशों की सूची से कम से कम नौ देशों को बाहर निकाल दिया गया है। पहले इस सूची में आकर्षक जगह बनाने वाले देश पोलैंड, चेक रिपब्लिक और हंगरी बाहर निकल गए हैं, जबकि दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व के देशों ने अपनी रैंकिंग में सुधार दर्ज किया है। मिस्त्र, जार्डन और वियतनाम पहली बार शीर्ष 10 देशों की सूची में शामिल हुए हैं। अरब देशों ने सुधारी रैंकिंगएटी की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात, ट्यूनीशिया और मोरक्को ने अपनी रैंकिंग में सुधार दर्ज किया है, जबकि मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीकी देश विशाल जनसंख्या और अपेक्षाकृत अधिक शिक्षित आबादी की वजह से यूरोप के नजदीक होने का लाभ उठा रहे हैं। भारत और फिलिपींस दुनिया के बीपीओ बाजार में 50 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं। एटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बार फिलिपींस को भारत के लिए खतरा बताया जाता है, लेकिन सच यही है कि वह भारत के बाद दूसरे स्थान पर है। फिलिपींस भी प्राथमिकता वाला देशएटी केर्नी के सीनियर पार्टनर सौरीन दोशी के मुताबिक फिलिपींस कॉल सेंटर भी प्राथमिकता वाला देश है और हम निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि जिस गति से चीन और अन्य दक्षिण एशियाई देश विकास कर रहे हैं, फिलिपींस भी उसी गति से विकास कर रहा है। भारत जिस वजह से आउटसोर्सिंग के लिए सबसे पसंदीदा स्थान बना है, उसमें विकास कायम है और ऐसा लगता है कि आर्थिक संकट से निपटने में इसका विकास दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले अधिक तेज रहेगा।भारत सिर्फ प्रतियोगी नहींदिलचस्प तथ्य यह है कि भारत अब सिर्फ प्रतियोगी के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में इसे इंडस्ट्री के विकास को तेज करने वाले कारक के रूप में भी जाना जाता है। दोशी कहते हैं कि भारतीय कंपनियाँ अब गुरिल्ला की तरह व्यवहार कर रही हैं और दुनिया भर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। इसकी वजह यह है कि इनके ग्राहक बहुत से इलाकों में उनसे सहायता की उम्मीद करते हैं।कम कीमत, कारोबारी माहौल, कुशल कर्मियों की प्रचुर उपलब्धता भारत के बारे में आउटसोर्सिंग के प्रमुख आकर्षण हैं।