अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने चौथे हफ्ते में अचानक नया मोड़ ले लिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले हवाई हमलों को 5 दिनों के लिए टालने का ऐलान कर दिया। क्या शांति की इस पहल में भारत के पड़ोसी पाकिस्तान का हाथ है। वे कौनसे मुस्लिम देश थे जो मध्यस्थ बने। अमेरिकी न्यूज़ पोर्टल 'एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दिनों से पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्री अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका ने युद्ध खत्म करने की तारीख ऐलान कर दिया है। अमेरिका ने 9 अप्रैल तारीख तय की है। हालांकि ट्रंप के बयान के बाद ईरान पर हमले जारी हैं। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
इस बीच ट्रंप के ऐलान के बाद बयान के बाद शेयर बाजारों में तेजी आना शुरू हो गई है। बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत में 13% की गिरावट आई है और यह लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।
हालांकि तेहरान ने दोटूक कहा है कि चूंकि युद्ध की शुरुआत अमेरिका ने की थी, इसलिए वॉशिंगटन को पर्दे के पीछे रहने की बजाय सीधे बातचीत की मेज पर आना होगा। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यावहारिक रूप से बंद कर देने से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा संकट गहरा गया है। पाकिस्तान के सीडीएफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की। इजराइली अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते इस्लामाबाद में बातचीत हो सकती है।
28 फरवरी को शुरू हुआ था संघर्ष
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई शीर्ष सैन्य और धार्मिक नेता मारे गए थे। जवाब में ईरान ने इजराइल और अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ हवाई अड्डों, तेल रिफाइनरियों और गैस टर्मिनलों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। चार हफ्तों से जारी इस जंग ने सऊदी अरब, यूएई और बहरीन जैसे देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
कैसे हुई सुलह
पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्रियों ने व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ अलग-अलग दौर की बातचीत की है। खबरें हैं कि मध्यस्थता की प्रक्रिया प्रगति पर है और मुख्य चर्चा युद्ध समाप्त करने के साथ-साथ सभी अनसुलझे मुद्दों को सुलझाने पर केंद्रित है। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती ने इस संघर्ष के क्षेत्रीय विस्तार को रोकने और इसके प्रभावों को सीमित करने पर जोर दिया है।
ट्रंप ने कहा- 5 दिन का समय, नहीं तो फिर करेंगे हमले
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर घोषणा की कि वे ईरान के बिजली उत्पादन केंद्रों पर हमले रोक रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम पांच दिनों का समय दे रहे हैं और देखेंगे कि चीजें कैसी रहती हैं। अगर सब ठीक रहा, तो हम मामला सुलझा लेंगे। वरना, हम फिर से बमबारी शुरू कर देंगे।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनकी बातचीत ईरान के एक ऐसे व्यक्ति से हुई है जो वहां 'सबसे सम्मानित' है, हालांकि उन्होंने सुरक्षा कारणों से नाम बताने से इनकार कर दिया। ट्रंप का कहना है कि ईरान समझौता चाहता है और अमेरिका भी इसके लिए तैयार है। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी ईरान के साथ "बेहद सकारात्मक और उत्पादक" बातचीत हुई है।
ईरान को कभी न मिले परमाणु हथियार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब हमारी बातचीत बहुत अच्छी चल रही है। यह कल रात शुरू हुई, उससे थोड़ी देर पहले वाली रात। मुझे लगता है कि वे बहुत अच्छे हैं। वे शांति चाहते हैं। वे इस बात पर सहमत हुए हैं कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं होगा। लेकिन हम देखें। उम्मीद है, हम एक ऐसी डील कर पाएंगे जो हम सभी के लिए अच्छी हो, जिसमें मध्य पूर्व के साथी भी शामिल हैं जो हमारे लिए बहुत अच्छे रहे हैं, जिसमें इज़राइल भी शामिल है, जो इस लड़ाई में एक बेहतरीन पार्टनर रहा है। लेकिन हम देखेंगे कि क्या होता है।
मुझे लगता है कि इस बात की बहुत अच्छी संभावना है कि हम एक डील पर पहुंच जाएंगे। ट्रंप ने कहा कि जैसा कि मैंने पहले बताया था, पिछले दो दिनों में यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच हुई शुरुआती बातचीत के आधार पर, मैंने डिपार्टमेंट ऑफ़ वॉर को ईरान में बड़े एनर्जी और बिजली टारगेट पर प्लान किए गए हमलों को कुछ समय के लिए टालने का निर्देश दिया है, लेकिन यह तय करने के लिए कि क्या कोई बड़ा समझौता हो सकता है, हमारी बहुत अच्छी बातचीत हुई है। बहुत, बहुत अच्छी बातचीत हुई है तो, उम्मीद है कि यह मुमकिन होगा, लेकिन चाहे कुछ भी हो, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार न मिले।
ट्रंप का प्यार, ईरान का इंकार
एक ओर जहां ट्रंप बातचीत का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को खारिज कर दिया है। ईरानी समाचार एजेंसी 'मेहर' के अनुसार, ईरान ने ट्रंप के दावों को सैन्य योजनाओं के लिए समय हासिल करने और तेल की कीमतें कम करने की एक चाल बताया है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि क्षेत्रीय देशों की पहल का वे स्वागत करते हैं, लेकिन चूंकि वे युद्ध शुरू करने वाले पक्ष नहीं हैं, इसलिए शांति की सभी शर्तें वॉशिंगटन को माननी होंगी। Edited by : Sudhir Sharma