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Last Updated :वॉशिंगटन , गुरुवार, 11 सितम्बर 2025 (11:54 IST)

ट्रंप ने भारत को लेकर क्यों बदले सुर, क्या फेडरल कोर्ट का फैसला बना वजह?

donald trump
Donald Trump News in Hindi : टैरिफ को लेकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। भारत को लेकर भी ट्रंप का रवैया स्पष्ट नहीं है। एक तरफ तो वह भारत को दोस्ती की दुहाई दे रहे हैं तो दूसरी ओर यूरोपीय संघ से भारत पर टैरिफ लगाने की बात कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप सोची समझी रणनीति के तहत ही भारत के साथ डबल गेम खेल रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि टैरिफ पर फेडरल कोर्ट का फैसला भी इसके पीछे बड़ी वजह हो सकता है।
 
भारत की ओर बढ़ाया दोस्ती का हाथ : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका, दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं। मैं आने वाले हफ़्तों में अपने बहुत अच्छे दोस्त, प्रधानमंत्री मोदी से बात करने के लिए उत्सुक हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे दोनों महान देशों के लिए एक सफल निष्कर्ष पर पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होगी!' पीएम मोदी ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की।
 
EU से ट्रंप ने क्या कहा : अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने EU से अपील की है कि चीन और भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाए। उन्होंन कहा कि भारत और चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से रूस पर दबाव बढ़ेगा, इससे रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त हो जाएगा। चीन और भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं।
 
टैरिफ पर फेडरल कोर्ट का क्या है फैसला : अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने पहले ही टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। अदालत का कहना है कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट के तहत ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ लगाने का फैसला लिया, लेकिन इस कानून में टैरिफ शब्द का उल्लेख ही नहीं है। अदालत ने ट्रंप प्रशासन को अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट में अपील का समय दिया है, तब तक टैरिफ लागू रहेगा। वह इस मामले में शीर्ष अदालत में जाने का फैसला ले चुके हैं। अगर टैरिफ पर रोक लगी तो अमेरिका को मिलने वाले लाखों करोड़ रुपए से हाथ धोना पड़ेगा।
 
भारत पर दबाव की रणनीति : अदालत के इस आदेश के बाद ट्रंप बैकफुट पर है। उन्हें इस बात का भी डर सता रहा है कि भारत इस मामले में फेडरल कोर्ट जा सकता है। यहां से उसे आसानी से राहत मिल सकती है। कहा जा रहा है कि भारत पर दबाव कम ना हो इसके लिए उन्होंने यूरोपीय संघ का सहारा लिया है।
 
edited by: Nrapendra Gupta 
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