सुषमा ने पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई

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Last Updated: शुक्रवार, 26 सितम्बर 2014 (10:14 IST)
न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री ने गुरुवार को कहा कि पिछले महीने इस्लामाबाद में भारत के विदेश सचिवों की निर्धारित मुलाकात से कुछ दिन पहले हुर्रियत नेताओं के साथ बातचीत करके पाक ने ‘वार्ता पर पानी फेर दिया।’
 
सुषमा स्वराज ने यहां जारी संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से अलग इब्सा (आईबीएसए) के विदेश मंत्रियों के साथ अपनी मुलाकात के बाद भारतीय संवाददाताओं को बताया, ‘नई सरकार (मोदी सरकार) ने एक नया संकेत दिया है। इसलिए उन्होंने (पाकिस्तान ने) वार्ता पर पानी फेर दिया और पूरा खेल बिगाड़ दिया।’
 
विदेश मंत्री से पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश मामलों के सलाहकार के इस कथित वक्तव्य पर टिप्पणी करने के लिए कहा गया कि दोनों देशों के बीच बातचीत तब ही हो सकती है जब नई दिल्ली पहल करे क्योंकि यह भारत ही था जिसने 25 अगस्त को होने वाली वार्ता रद्द की थी।
 
सुषमा ने कहा, ‘पहले और दूसरे का सवाल नहीं है। जहां तक हमारी प्रतिक्रिया का संबंध है तो हमने बार-बार कहा कि अगर कोई प्रतिक्रिया आनी है तो इसी समय आए। हमारी तरफ से पहल की गई थी।’
 
उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे जिन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किया था। स्वराज ने कहा कि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में इस बारे में भी विचार किया गया था कि वाघा अटारी सीमा पर हमें तुरंत व्यापार प्रारंभ करना चाहिए।
 
उन्होंने कहा कि शरीफ ने सुझाव दिया था कि दोनों देशों के विदेश सचिवों को मिलकर बातचीत करना चाहिए और हम इस पर राजी हो गए।
 
उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा, ‘लेकिन जैसे ही 25 अगस्त को बातचीत होनी थी, उससे महज चार दिन पहले पाकिस्तान के राजदूत ने हुर्रियत के नेताओं के साथ बातचीत की, तो फिर खेल किसने बिगाड़ा।’
 
अजीज ने भी कहा था कि इसमें ऐसा कुछ नया नहीं है कि पाकिस्तान के अधिकारी हुर्रियत के नेताओं से बात कर रहे हैं और ऐसी बातचीत तो पिछले 20 से सालों से होती आ रही हैं। स्वराज ने कहा कि जहां तक हुर्रियत के नेताओं से बात करने की बात है तो जो नेता पाकिस्तान से आते हैं वे उनके साथ बात करते रहे हैं।
 
उन्होंने कहा, ‘लेकिन जब पहली बार प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भारत आए तो उन्होंने उनसे बात नहीं की क्योंकि वे भारत का इशारा समझ गए थे। बात वहीं से शुरू होती है।’ स्वराज ने कहा, ‘लेकिन वार्ता से पहले ही उच्चायुक्त हुर्रियत के नेताओं से बातचीत करें ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।’
 
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि उन्होंने अभी तक अजीज से बात नहीं की, लेकिन वे दोनों कल राष्ट्रमंडल और दक्षेस देशों के विदेश मंत्रियों की बैठकों के लिए मौजूद थे। अजीज से स्वराज की पिछली मुलाकात 12 सितंबर को दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन में हुई थी, जहां दोनों ने सम्मेलन के अंतराल (ब्रेक) के दौरान एक दूसरे का अभिवादन किया था।
 
ताजकिस्तान की राजधानी में हुई इस मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा, ‘जब आप खाने की एक ही मेज पर बैठे होते हैं, तब वहां शिष्टाचार निभाना होता है। हमने एक दूसरे का अभिवादन किया।’ दक्षेस की बैठक में शामिल होने से पहले अजीज ने भारतीय संवाददाताओं के एक समूह से कहा था कि भारत-पाकिस्तान वार्ताएं सिर्फ तभी हो सकती हैं, जब नई दिल्ली पहल करे।
 
उन्होंने कहा था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच बैठक की कोई संभावना नहीं है।
 
जब उनसे पाकिस्तानी दूत अब्दुल बासित की हुर्रियत नेताओं के साथ बातचीत को लेकर भारत की नाराजगी के बारे में पूछा गया तो अजीज ने कहा, ‘भारत की ओर से कुछ ज्यादा ही प्रतिक्रिया दे दी गई।’ उन्होंने कहा, ‘हुर्रियत के साथ बातचीत कोई नई बात नहीं है। (पाकिस्तानी अधिकारी) पिछले 20 सालों से हुर्रियत के नेताओं से मिलते रहे हैं। हमारी ओर से कोई पहल नहीं होगी। पहल भारत की ओर से की जानी चाहिए।’ सीमा पर संघषर्विराम उल्लंघनों से जुड़ी भारत की चिंताओं के बारे में अजीज ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से कोई उल्लंघन नहीं किया गया। (भाषा)



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