सुरेशभाई पटेल पर हमला, जूरी अनिर्णय की स्थिति में
वॉशिंगटन। अमेरिका में एक भारतीय बुजुर्ग के खिलाफ पुलिस की बर्बरता के मामले की सुनवाई कर रही 12 सदस्यीय जूरी चार दिनों तक मैराथन विचार-विमर्श करने के बावजूद किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंच पाई। इससे पहले, मामले की पहली बार सुनवाई के समय भी जूरी सितंबर में कोई निर्णय नहीं ले पाई थी।
डिस्ट्रिक्ट जज मेडलिन ह्यूज हैकला ने बुधवार को कहा कि एरिक पार्कर के खिलाफ दूसरी बार सुनवाई के दौरान भी कोई फैसला नहीं हो पाया। पूर्व पुलिस अधिकारी पार्कर पर इस वर्ष की शुरुआत में 58 वर्षीय सुरेशभाई पटेल पर अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप है जिसके कारण पटेल आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गए थे।
दोषी पाए जाने पर 27 वर्षीय पार्कर को 10 साल कारावास की सजा हो सकती है। मेडलिन ने कहा कि जूरी ने उन्हें सूचित किया कि वे दो बार वोट करने के बावजूद किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंच सके इसलिए पार्कर के मामले की सुनवाई के बाद अनिर्णय की स्थिति घोषित की गई।
अलबामा की राजधानी हंट्सविले में नौ महिलाओं और तीन पुरुषों की सदस्यता वाली जूरी ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों एवं गवाहों को कई दिनों तक सुनने के बाद चार दिनों तक 16 से अधिक घंटे विचार-विमर्श किया।
जूरी ने गत सोमवार को वह वीडियो कई बार देखा जिसमें दिखाई दे रहा है कि पार्कर ने सुरेशभाई पर बल प्रयोग करके उन्हें जमीन पर गिराया जिससे वे आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गए। यह वीडियो एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है। जज ने गत मंगलवार को जूरी को विचार विमर्श जारी रखने और किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए प्रोत्साहित किया था।
कई घंटों तक विचार विमर्श करने के बाद जूरी ने बुधवार को जज को सूचित किया कि वह सर्वसम्मति से कोई निर्णय नहीं ले पाई। जूरी के दूसरी बार किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंच पाने के बाद पार्कर के अटॉर्नी रोबर्ट टुटेन ने पार्कर को दोषमुक्त ठहराने का निर्णय दिए जाने के लिए याचिका दायर की।
टुटेन ने कहा, ‘वह (पार्कर) निराश है कि उसे स्पष्ट रूप से दोषमुक्त करार नहीं दिया गया लेकिन वह खुश भी है कि उसे स्पष्ट रूप से दोषी करार नहीं दिया गया।’ अमेरिकी अटॉर्नी रोबर्ट पोजे ने कहा कि वह पार्कर के लिए तीसरी बार सुनवाई किए जाने की मांग करेंगे क्योंकि इस याचिका को जज ने खारिज कर दिया। (भाषा)