फ्रांस में गर्मी बनी मौत का कारण: हजारों लोगों की जान गई, पेरिस के शवगृह फुल, जलवायु परिवर्तन ने तोड़े पुराने रिकॉ
फ्रांस की राजधानी पेरिस के आस पास बीते चार दिनों में इतनी मौतें हुई कि शवगृहों में जगह कम पड़ गई है। भीषण गर्मी ने यूरोप में कई देशों में रिकॉर्ड तोड़े।
ओंकार सिंह जनौटी
पेरिस के एक शवगृह में लगातार फोन आ रहे हैं। फोन करने वाले यही पूछते हैं कि, क्या एक शव रखने की जगह मिलेगी? जौहर एर्टेली अफसोस भरी आवाज में जवाब देते हैं, "नहीं।" और ऐसा जवाब वह दिन में कई बार देते हैं।
एर्टेली के कोल्ड रूम में 32 शवों को रखने की जगह है। वह कहते हैं, "मुझे सैकड़ों फोन आ रहे हैं। हम एक बड़ी त्रासदी देख रहे हैं।" ALSO READ: पिछड़े देशों में पलायन से अमीर देशों को हुआ खूब फायदा
एर्टेली ने अपने पेशे से जुड़े अन्य लोगों से भी बातचीत की। उन्होंने भी हेर्टेली को बताया कि 80 किलोमीटर दूर से भी शव पेरिस के शवगृहों तक लाए जा रहे हैं। ज्यादा जगह बनाने के लिए एर्टेली ने प्रशासन से अपने शवगृह के बाहर रेफ्रीजेरेटर लगाने की अनुमति मांगी है। पेरिस एयरपोर्ट के पास मौजूद उनके शवगृह को अब तक अतिरिक्त रेफ्रीजेरेटर लगाने की अनुमति का इंतजार है।
एर्टेली कहते हैं, "परिवार पीड़ा में हैं। हमारे पास उन्हें राहत देने के लिए कोई समाधान नहीं है क्योंकि अंत्येष्टि गृह भरे हुए हैं। हमारी पूरी संवेदनाएं उनके साथ हैं, लेकिन फिर भी हम कुछ नहीं कर सकते। हम एक मुश्किल से जूझ रहे हैं, बहुत बड़ी मुश्किल से।"
फ्रांस में पिछले हफ्ते भीषण गर्मी ने हजारों लोगों की जान ली। 24 से 27 जून तक देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। पब्लिक हेल्थ फ्रांस के मुतबिक, 24 जून को देश में 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। 25 जून को 1,400 लोग मारे गए और फिर 26 जून को भी 1,400 जानें गईं। अधिकारियों के मुताबिक, भीषण गर्मी से पहले अप्रैल और मई में औसतन एक दिन में 900 से 1,000 लोगों की मौत होती थी। शवगृहों का सिस्टम इसी संख्या के लिए तैयार किया गया था।
अंतिम संस्कार सेवाएं देने वाले व्यवसाय से जुड़े लोगों के मुताबिक, राजधानी पेरिस में शव रखने वाले मुर्दाघर भर चुके हैं। शहर के सिटी हॉल के मुताबिक, 20-20 की क्षमता वाली दो अस्थायी स्टोरेज यूनिट्स भी शुरू की गई है। इनके अलावा शहर के अस्पतालों में 50 अन्य शवों के लिए जगह बनाई गई है। ALSO READ: इंसाफ मांगता अमेरिकी हमले में मारे गए भारतीय नाविक का परिवार
बदलती जलवायु की चोट कितनी घातक
फ्रांस में अब तक दर्ज मौतों में से करीब 85 फीसदी लोग 65 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। बुजुर्गों की मौत के सबसे ज्यादा मामले राजधानी क्षेत्र पेरिस और उसके आस पास सामने आए।
जलवायु परिवर्तन के विकराल होते असर के बीच जून 2026 के आखिर में पड़ी गर्मी ने 2003 के रिकॉर्ड भी तोड़ दिए। 2003 की गर्मियों में फ्रांस में करीब 15,000 लोगों की मौत हुई थी। उसके बाद बुजुर्गों की देखभाल को लेकर देश में कई वादे व दावे किए गए। 2025 में भी असामान्य गर्मी के कारण 5,700 से ज्यादा मौतें हुई थीं।
पेरिस की अंतिम संस्कार सेवा से जुड़ी वेरोनिक बेरत्रां कहती हैं कि लोग पिछली सीख भूल चुके हैं। उन्होंने कहा, "जिन लोगों की मौत हुई, उनमें से ज्यादातर अकेले रह रहे थे। उनकी स्थिति देखकर यही लगता है कि ये मौतें गर्मी के कारण हुईं।"
उन्होंने लोगों से ज्यादा जागरूक होने की अपील की है। उनके मुताबिक, पड़ोसियों का ध्यान रखना जरूरी है और जो लोग अकेले रहते हैं, उनकी समय समय पर मदद की जानी चाहिए।
बेरत्रां कहती हैं, "समय के साथ हम शायद भूल गए हैं कि ये फिर से हो सकता है। और हालात और भी खराब हो सकते हैं।" ALSO READ: ब्रेक्जिट के 10 साल: ब्रिटेन को भारी पड़ा अलग होने का फैसला
शवगृहों में इतनी भीड़ क्यों?
एशिया और अफ्रीका के कई देशों में जहां मृतक का अंतिम संस्कार जल्द ही कर दिया जाता है, वहीं यूरोप और अमेरिका में अंतिम संस्कार कुछ दिनों या हफ्तों बाद किया जाता है। नोटरी से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद और मृतक के रिश्तेदार, कब्रगाह में जगह के लिए कागजी कार्रवाई करते हैं, स्मृति पटल तैयार करवाते हैं। इसी दौरान शुभचिंतकों को सूचित कर, कई हफ्ते बाद की एक तारीख दी जाती है, ताकि अंतिम संस्कार में सब लोग शामिल हो सकें।
तब तक शव को मॉर्चुरी में रखा जाता है। अंतिम संस्कार से जुड़ी सेवाएं, दफनाने वाले दिन शव को ताबूत में तैयार करके लाते हैं और फिर आखिरी विदाई दी जाती है।
कितना ज्यादा तपा यूरोप
22 से 28 जून तक रही भीषण गर्मी के दौरान फ्रांस और जर्मनी के बड़े हिस्से में तापमान औसत से 12.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। ब्रिटेन में यह तपिश 10 से 12.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रही। वहीं इटली के बड़े हिस्से में तापमान औसत से 7.5 से 10 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया।
जलवायु परिवर्तन का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक, 2015 से 2025 के बीच, आर्कटिक (1.18 डिग्री) और यूरोप (.87 डिग्री) का बेसलाइन टेम्प्रेचर सबसे ज्यादा बढ़ा है। जर्मनी, चेक गणराज्य, पोलैंड और हंगरी में 27 जून को अब तक का सबसे ज्यादा गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया।

