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अकाल तख्त का भगवंत मान सरकार को बड़ा अल्टीमेटम, 1 महीने में बेअदबी कानून बदलने का दिया आदेश
पंजाब की भगवंत मान सरकार के 9 मंत्री और 30 विधायक नंगे पांव श्री अकाल तख्त साहिब पर पहुंचे और बेअदबी कानून पर लिखित में अपना स्पष्टीकरण दिया। अकाल तख्त ने मान सरकार से एक माह में बेअदबी कानून में संशोधन करने को कहा। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब की कार्यवाही का पहली बार सीधा प्रसारण भी किया गया। बताया गया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुरोध पर कार्यवाही का सीधा प्रसारण कराया गया। ALSO READ: कौन हैं रिटायर्ड IAS योगेश्वर राम मिश्रा, जो हो सकते हैं राम मंदिर के CEO?
श्री अकाल तख्त साहिब में सोमवार को पंजाब सरकार की ओर से पारित जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अकाल तख्त साहिब से पंजाब सरकार के सिख मंत्रियों, विधायकों तथा विधानसभा अध्यक्ष को एक माह का समय दिया गया है। इस अवधि के भीतर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से दिए गए सुझावों के अनुरूप कानून में आवश्यक संशोधन करने के लिए कहा गया है।
अकाल तख्त के आदेश पर पंजाब सरकार के सभी सिख मंत्री और विधायक श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे थे। सभी अपने साथ लिखित स्पष्टीकरण भी लेकर आए, जिसे पांच सिंह साहिबानों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस दौरान कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और निर्दलीय विधायक भी मौजूद रहे। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी
निज्जर ने रखा सरकार का पक्ष
विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब यह स्पष्ट करे कि अधिनियम में किन-किन प्रावधानों को शामिल किया जाना चाहिए। इस पर कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि कानून बनाना सरकार का अधिकार है, लेकिन धर्म से जुड़े किसी भी कानून में संशोधन या नया प्रावधान लाने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब से परामर्श करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार को धार्मिक मामलों में सिख संस्थाओं की राय को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि जिस दिन यह विधेयक पारित हुआ था, उसी दिन उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया था कि पहले सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट सदन में रखी जानी चाहिए थी। उनका कहना था कि कमेटी कई महीनों से इस विषय पर काम कर रही थी, इसलिए उसकी सिफारिशों पर पहले चर्चा होनी चाहिए थी।
edited by : Nrapendra Gupta
