मिडिल ईस्ट में बड़ी राहत, इस तरह रुका ईरान और अमेरिका के बीच संभावित युद्ध
Iran US tensions: अमेरिका की धमकी के बाद मिडिल ईस्ट एक ऐसे ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा था, जो किसी भी क्षण फट सकता था। अमेरिका और ईरान के बीच की तल्खी के चलते पूरी दुनिया की सांसें थम गई थीं। लेकिन, ईरान के तीन पड़ोसी देशों की बदौलत संभावित युद्ध का मामला फिलहाल टल गया है। हालांकि इसके पीछे ईरान की धमकी को भी माना जा रहा है।
ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच खतरे की घंटी तब बजी जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शनकारियों के दमन को लेकर सीधी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे दी। तेहरान ने भी पलटवार में देरी नहीं की। ईरान ने साफ कर दिया कि अगर एक भी गोली चली, तो खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और युद्धपोत खंडहर में तब्दील कर दिए जाएंगे। अमेरिका को कतर स्थित अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे अल उदेद एयरबेस से आनन-फानन में अपने कर्मियों को हटाना पड़ा।
इन तीन देशों ने रोकी जंग
अमेरिका द्वारा अपने कर्मचारियों को हटाने के बाद माना जा रहा है कि युद्ध कभी भी छिड़ सकता है। लेकिन, सऊदी अरब, कतर और ओमान की कूटनीतिक पहल के चलते संभावित युद्ध रुक गया। बताया जा रहा है कि इन देशों के अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप से सीधी बातचीत की। उनका तर्क था कि ईरान को अपनी स्थिति साफ करने का एक आखिरी मौका मिलना चाहिए। खाड़ी देशों ने इसे 'आखिरी मिनट की जद्दोजहद' करार दिया है।
ईरान को स्पष्ट संदेश
एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने अमेरिका को दो टूक शब्दों में चेताया कि ईरान पर हमला सिर्फ एक देश की तबाही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आत्मघाती साबित होगा। इन देशों ने केवल वॉशिंगटन, बल्कि तेहरान पर भी कूटनीतिक दबाव बनाया। ईरान को स्पष्ट संदेश दिया गया कि अगर आपकी तरफ से एक भी हमला खाड़ी के अमेरिकी ठिकानों पर हुआ, तो क्षेत्रीय देशों के साथ आपके रिश्ते हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे।
फिर ट्रंप के तेवर नरम पड़े
माना जा रहा है कि ईरान ने इन देशों को आश्वासन दिया कि वह प्रदर्शनकारियों की फांसी पर रोक लगाएगा और तनाव को और नहीं बढ़ाएगा। ईरान से मिले भरोसे के बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर नरम पड़े। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें 'बेहद महत्वपूर्ण सूत्रों' से यह यकीन दिलाया गया है कि ईरान कोई कठोर कदम नहीं उठाएगा। इसी भरोसे के दम पर सैन्य विकल्प को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और अल-उदेद एयरबेस पर फिर से रौनक लौटने लगी। फिलहाल शांति की बातचीत जारी है। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह स्थिरता कितनी टिकाऊ होगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala