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Last Updated :तेहरान , बुधवार, 14 जनवरी 2026 (13:15 IST)

20 हजार की चाय, 50 हजार की ब्रेड, महंगाई से ईरान में बवाल, रियाल का भी बुरा हाल

protest in iran
Protest in Iran : ईरान में महंगाई के खिलाफ 28 दिसंबर से भड़के विरोध प्रदर्शन के दौरान अब तक 2500 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई जबकि हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन प्रदर्शनों के पीछे की वजह महंगाई और खराब होती अर्थव्यवस्था बताई गई। यहां 1 कप चाय 20000 रियाल में मिल रही है तो 1 लीटर दूध के 30 हजार रियाल चुकाने पड़ रहे हैं। एक ग्लास जूस की कीमत 50 हजार रियाल हो गई। ब्रेड का एक पैकेट भी यहां 50 हजार रियाल के बिक रहा है। ALSO READ: अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने प्रदर्शनकारियों को उकसाया, ट्रंप और नेतन्याहू को किसने बताया ईरानियों का हत्यारा?
 
हालांकि पहले लोग महंगाई और करेंसी की गिरती वैल्यू के कारण सड़क पर थे पर अब वे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के खिलाफ नजर आ रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि तेल और गैस के भंडार वाले ईरान में अर्थव्यवस्था का हाल क्यों बेहाल हो गया? वहां की करेंसी शून्य के करीब कैसे पहुंच गई।
 
दुनिया के कई देशों ने ईरान की करेंसी रियाल में कारोबार बंद कर दिया है। भारतीय करेंसी में देखें तो 1 रियाल की कीमत 0.000091 पैसे पर पहुंच गई, जबकि डॉलर के मुकाबले रियाल 0.0000010 सेंट पर है। यूरो के मुकाबले रियाल की वैल्यू शून्य पर पहुंच गई। यहां महंगाई दर आधिकारिक तौर पर 40% को पार कर चुकी है। ALSO READ: ट्रंप के ईरानी प्रदर्शनकारियों को उकसाने से रूस नाराज, अमेरिका को दी चेतावनी
 
लोगों की जेब में पैसे तो है लेकिन वे कागज से नजर आ रहे हैं। गिरती करेंसी वैल्यू और आसमान छूती महंगाई ने लोगों को भूखे रहने पर मजबूर कर दिया। लोग दाने दाने को मोहताज नजर आ रहे हैं। यहां खाना तो दूर लोग एक कप चाय के लिए भी तरस गए हैं। भूखे बच्चों को देख लोग सड़क पर प्रदर्शन के लिए मजबूर है। 
 
अमरिकी प्रतिबंधों ने तोड़ी ईरान की कमर : साल 2015 में ईरान हर दिन तकरीबन 2.5 मिलियन बैरल तेल बेच रहा था। इस समय अमेरिका ने न्यूक्लियर डील (JCPOA) साइन की थी। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था सुधरने की उम्मीद थी। 2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका को इस डील से बाहर खींच लिया। इसके बाद वह ईरान पर शिकंजा कसता चला गया।
 
अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान के लिए तेल बेचना मुश्‍किल हो गया। इस वजह से 2019-20 तक ईरान का तेल निर्यात 5 लाख बैरल से भी कम रह गया। निर्यात कम होने से विदेशी मुद्रा की कमी हो गई और ईरान का खजाना खाली होता चला गया। इससे ईरानी रियाल की कीमत तेजी से गिरने लगी।
 
अमेरिका एक बार फिर ईरान से कारोबार कर रहे देशों पर दबाव बना रहा है। उसने ईरान से ट्रेड करने वाले देशों पर अमेरिका से कारोबार करने पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इससे वह आर्थिक रूप से ईरान को बर्बाद करना चाहता है।
edited by : Nrapendra Gupta 
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