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Last Updated : गुरुवार, 15 जनवरी 2026 (16:54 IST)

ईरान में सत्ता परिवर्तन हुआ तो भारत पर क्या होगा असर? 8 पॉइंट्‍स में समझें

Instability in Iran
Impact of political instability in Iran on India: ईरान में वर्तमान राजनीतिक हलचल और विरोध प्रदर्शनों के बीच वहां सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। इस घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर है। ईरान में राजनीतिक अस्थिरता या सरकार बदलने का भारत पर भी निश्चित ही असर होगा। ईरान भारत की 'कनेक्टिविटी और ऊर्जा सुरक्षा' का प्रमुख स्तंभ रहा है। आइए जानते हैं, यदि ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है, तो भारत के लिए इसके क्या फायदे और नुकसान हो सकते हैं। 
 
संभावित फायदे : 
1. सस्ते कच्चे तेल की वापसी : वर्तमान में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ईरान से तेल नहीं खरीद पा रहा है। यदि नई सरकार आती है और अमेरिका के साथ उसके संबंध सुधरते हैं, तो भारत को फिर से ईरान से सस्ता और गुणवत्तापूर्ण कच्चा तेल मिल सकेगा। इससे भारत का 'इंपोर्ट बिल' कम होगा।
 
2. चाबहार पोर्ट का विस्तार : सत्ता परिवर्तन के बाद यदि स्थिरता आती है, तो चाबहार बंदरगाह परियोजना में तेजी आएगी। यह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का सीधा रास्ता देता है।
 
3. निवेश के नए अवसर : एक उदार या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत सरकार आने से भारतीय कंपनियों विशेषकर इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर के लिए ईरान में निवेश के बड़े रास्ते खुल सकते हैं। चावल और फार्मा निर्यात में वृद्धि हो सकती है। 
 
4. क्षेत्रीय सुरक्षा : ईरान में एक स्थिर और कम कट्टरपंथी सरकार पूरे पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने में सहायक हो सकती है, जिससे वहां रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
 
संभावित चुनौतियां : 
 
5. अस्थिरता और गृहयुद्ध का खतरा : यदि सत्ता परिवर्तन हिंसक होता है, तो ईरान में लंबे समय तक अस्थिरता रह सकती है। इससे भारत के करोड़ों डॉलर के निवेश (जैसे चाबहार और INSTC) अधर में लटक सकते हैं। इससे निवेश डूबने का खतरा भी पैदा हो सकता है साथ ही कनेक्टिविटी भी बाधित हो सकती है। 
 
6. चीन का बढ़ता प्रभाव : वर्तमान शासन के दौरान चीन ने ईरान के साथ 25 साल का बड़ा रणनीतिक समझौता किया है। यदि नई सरकार भी चीन की ओर झुकी रहती है, तो यह भारत की 'कनेक्टिविटी' रणनीति के लिए बड़ा झटका होगा। इससे पाकिस्तान-चीन का गठबंधन मजबूत हो सकता है।
 
7. अमेरिकी दबाव और टैरिफ : हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। सत्ता परिवर्तन के संक्रमण काल में भारत को अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाना बहुत कठिन हो सकता है।
 
8. आपूर्ति श्रृंखला में बाधा : ईरान में तनाव बढ़ने से 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) के बंद होने का खतरा बढ़ सकता है, जहां से भारत का 40 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। यदि आपूर्ति ठप होती है ‍तो देश में महंगाई और बढ़ सकती है। 
 
इसमें कोई संदेह नहीं स्थिर ईरान भारत के लिए बहुत मायने रखता है। ईरान में सत्ता परिवर्तन यदि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से होता है तो यह भारत के लिए दीर्घकालिक लाभ लेकर आएगा। लेकिन, यदि वहां लंबे समय तक संघर्ष चलता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक योजनाएं (Chabahar Port) गंभीर संकट में पड़ सकती हैं। हालांकि भारत की पूरे मामले पर सतर्क निगाह है। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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