रिपोर्ट - एसएस
Donald Trump on the path of dictatorship: अमेरिका, जिसे लंबे समय से लोकतंत्र का प्रतीक माना जाता रहा है, आज एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में उभरती व्यक्तित्व-पूजा और सत्ता पर उनकी मजबूत पकड़ ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विश्व का सबसे पुराना और महान लोकतंत्र तानाशाही की ओर बढ़ रहा है? 'द गार्डियन' में एंड्रयू रॉथ के लेख 'क्या ट्रम्प अमेरिकी निरंकुशता को सामान्य बनाने में सफल हुए हैं?' में राजनीतिक वैज्ञानिकों के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप के कार्यों में निरंकुश शासकों जैसा व्यवहार दिखता है, जिसमें विरोधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी और सत्ता का केंद्रीकरण शामिल है। यह विचार कि अमेरिका तानाशाही से सिर्फ एक चुनाव दूर है, न केवल चिंताजनक है, बल्कि गंभीर चिंतन के लिए मजबूर करता है।
लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा : ट्रंप का शासनकाल कई मायनों में तानाशाही के लक्षणों को दर्शाता है। उनकी मंत्रिमंडल की लंबी बैठकों में प्रशंसा भरे भाषण और विरोधियों को 'उग्रवादी' कहकर अपमानित करना हमें सत्तावादी नेताओं की याद दिलाता है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' में ट्रंप को 'स्ट्रांगमैन' के रूप में वर्णित करते हुए कहा गया है कि उनका दूसरा कार्यकाल सत्तावादी शासन की ओर ले जा सकता है। उदाहरण के लिए, ट्रंप ने कमला हैरिस की सुरक्षा हटाने की कोशिश की और आलोचक जॉन बोल्टन पर एफबीआई से छापा पड़वाया। 'द अटलांटिक' ने इन कार्यों को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बताया, विशेष रूप से सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के प्रति उनके इनकार और कानून के शासन की अवहेलना को। ये कदम न केवल सत्ता के केंद्रीकरण को दर्शाते हैं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करने का प्रयास भी हैं।
नागरिकों में डर का माहौल : 'द गार्डियन' के अनुसार, इमिग्रेशन नीतियों के नाम पर आम नागरिकों में डर का माहौल बनाया जा रहा है। नेशनल इमिग्रेशन लॉ सेंटर की रिपोर्ट 'ट्रम्प की सत्तावादी खेल पुस्तिका' में बताया गया है कि आव्रजन प्रवर्तन को सत्ता मजबूत करने के उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मिशिगन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉन मोइनिहान का कहना है कि अमेरिका अब 'प्रतिस्पर्धात्मक तानाशाही' की ओर बढ़ रहा है। सरकार का ब्यूरोक्रेसी, सेना, न्यायपालिका, शिक्षा और मीडिया पर नियंत्रण की कोशिश तानाशाही के स्पष्ट संकेत हैं। 'कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस' की पत्रिका 'पर्सपेक्टिव्स ऑन पॉलिटिक्स' में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की सत्तावादी प्रवृत्तियों और पक्षपातपूर्ण ध्रुवीकरण ने अमेरिकी लोकतंत्र की मजबूती के लिए गंभीर चुनौतियां पेश की हैं।
संकट बड़ा है : मिस्र के कार्यकर्ता अब्दुलरहमान एलजेंडी का अनुभव इस खतरे को और स्पष्ट करता है। वे कहते हैं कि तानाशाही का असली प्रभाव जेलों से नहीं, बल्कि उस डर से होता है जो लोगों को चुप करा देता है। 'फॉरेन अफेयर्स' ने ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' दृष्टिकोण की तुलना अन्य लोकलुभावन और सत्तावादी नेताओं से की है, जो लोकतांत्रिक मानदंडों को कमजोर करता है। जब लोग यह सोचने लगते हैं कि उनकी आवाज उठाने की कीमत गिरफ्तारी हो सकती है, तो लोकतंत्र की आत्मा खतरे में पड़ जाती है। मानवाधिकार कार्यकर्ता नोआ बुलॉक की चेतावनी कि जब सुरक्षा बल पूरी आबादी को दुश्मन समझने लगते हैं, तो परिणाम गंभीर होते हैं, इस संकट की गहराई को दर्शाती है।
ट्रंप की 'विजेता सब कुछ ले जाता है' वाली राजनीति और रिपब्लिकन पार्टी की गेरिमैंडरिंग ने अमेरिकी लोकतंत्र को और कमजोर किया है। 'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने ट्रंप के बयानों की सत्यता की जांच करते हुए प्रेस पर उनके हमलों और लोकतांत्रिक परंपराओं की अवहेलना पर चिंता जताई है। प्रोटेक्ट डेमोक्रेसी की रिपोर्ट '2025 के लिए सत्तावादी खेल पुस्तिका' में चेतावनी दी गई है कि भविष्य का ट्रंप प्रशासन स्वतंत्र संस्थानों को निशाना बना सकता है और असहमति को दबाने के लिए गलत सूचना का उपयोग कर सकता है। कुछ लोग मानते हैं कि मध्यावधि चुनाव इस स्थिति को सुधार सकते हैं, लेकिन स्टेसी अब्राम्स और प्रोफेसर किम शेप्पेले हंगरी और वेनेजुएला जैसे देशों का उदाहरण देकर चेतावनी देते हैं कि हमें यह नहीं मानना चाहिए कि एक चुनाव सब कुछ ठीक कर देगा। ट्रंप की अमेरिकी शैली की तानाशाही को रोकने का एकमात्र तरीका है इस खतरे की गंभीरता को समझना और समय रहते कदम उठाना।
रास्ते से भटका लोकतंत्र : एलजेंडी का यह कहना कि अमेरिका एक मजबूत लोकतंत्र था जो रास्ते से भटक गया, एक भ्रामक धारणा है। उनका मानना है कि लोकतंत्र को इस तरह बनाया गया है कि वह हमेशा अधिनायकवाद की ओर फिसल सकता है। यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की एक अंतर्निहित खामी है। जब तक इस खामी को संबोधित नहीं किया जाता, अमेरिका तानाशाही से एक चुनाव की दूरी पर ही रहेगा।
अमेरिका का लोकतंत्र आज एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। ट्रंप की नीतियां और सत्ता पर उनकी पकड़ ने न केवल लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर किया है, बल्कि नागरिकों के मन में डर और अविश्वास पैदा किया है। यदि समय रहते इस खतरे को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र तानाशाही के रास्ते पर और आगे बढ़ सकता है।