कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप नहीं:अमेरिका

वॉशिंगटन (भाषा)| भाषा|
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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के एक अहम सहयोगी ने पर मुंबई हमलों के षड्यंत्रकारियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए पहला कदम उठाने पर जोर डालते हुए कहा है कि अमेरिका का कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन वह तनाव कम करने के और पाकिस्तान के हर प्रयास का समर्थन करेगा।


भारत में कुछ तबकों में आशंका है कि हो सकता है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड हालब्रुक को दी गई जिम्मेदारियों में कश्मीर मुद्दा भी शामिल हो।

इन आशंकाओं को दूर करते हुए अफगानिस्तान-पाकिस्तान के प्रति नई अमेरिकी रणनीति बनाने वाली अंतर एजेंसी समिति के सहअध्यक्ष ने कहा कि मैं नहीं सोचता कि ओबामा प्रशासन का कश्मीर में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा है।

सीआईए के इस पूर्व अधिकारी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में कमी और द्विपक्षीय समग्र वार्ता की बहाली देखना अमेरिका के हित में है।


राइडल ने कहा‍ कि लेकिन अंत में मूल रूप से यह भारतीयों और पाकिस्तानियों पर निर्भर करता है कि वे क्या फैसले करते हैं और उसके मुताबिक किस तरह नीतियों को बदलते हैं। अमेरिका एक हिमायती हो सकता है और उसे होना भी चाहिए, लेकिन यह भारतीयों और पाकिस्तानियों पर निर्भर करेगा कि वे आपसी तनाव कम करने के लिए क्या तरीका ढूँढते हैं।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में पहला कदम यह होगा कि पाकिस्तान मुंबई में गत नवंबर में 160 लोगों का संहार करने के जिम्मेदार षड्यंत्रकारियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए कदम उठाए। यह पहला कदम है। इसके बिना पाकिस्तान और भारत के बीच संबंधों में तनाव में कमी देखना बेहद मुश्किल होगा।

राइडल ने कहा कि वे ऐसा नहीं समझते कि भारत की कोई सरकार गत वर्ष मुंबई में क्या हुआ वह भूल सकती है और न ही उसे यह आसानी से भूलना चाहिए।
उन्होंने कहा ‍कि पाकिस्तान सरकार सबूत देने के लिए कह रही है। मेरे विचार में भारत ने सबूत मुहैया कराए हैं। अब समय लश्कर-ए-तोइबा, जमात-उद-दावा और आतंकवादी हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का है।



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