अरब सागर के 5 रोचक तथ्‍य

अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: बुधवार, 24 फ़रवरी 2021 (12:59 IST)
भारत के एक ओर हिमालय तो तीन और है। भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और जिसके 13 राज्यों की सीमा से समुद्र लगा हुआ है। दक्षिण में हिन्द महासागर, पश्‍चिम में और पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। आओ जानते हैं इस बार अरब सागर के 5 रोचक जानकारी।

अरब सागर :
1. हिन्द महासागर का पश्तिमोत्तर भाग अरब सागर कहलाता है। योरप के लोग इसी मार्ग से भारत आते रहे हैं। यह पूर्व में भारत पश्चिम में अफ्रीकी अंतरद्वीप और अरब प्रायद्वीप से, उत्तर में ईरान और पाकिस्तान और दक्षिण की ओर हिन्द महासागर के शेष भाग से घिरा हुआ है। बंगाल की खाड़ी की अपेक्षा यहां कम दबाव वाले ही चक्रवात बनते हैं।

2. यह सागर लगभग 38,62,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसकी अधिकतम चौढ़ाई लगभग 2,400 किलोमीटर है और गहराई: 4,652 मीटर अर्थात 15,262 फीट है जबकि सतही क्षेत्रफल 3,862,000 किलोमीटरमी2 का माना जाता है। इसकी औसत गहराई 2,987 मीटर से अधिक है।

3. इसके तट पर केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु है। भारत के लक्ष्यद्वीप, दादर, नगर हवेली और दमण-दीव इसी सागर में हैं। लक्षद्वीप भारत के दक्षिण-पश्चिम (मालाबार) तट से 160 और 400 किमी के बीच स्थित मूंगे के प्रवाल द्वीपों का समूह है। इस सागर में सोकोत्रा (यमन का एक भाग), अफ्रीकी हॉर्न के निकट, ओमान के तट के निकट कुरिया मुरिया द्वीप समूह भी है। इसके अलावा मालदीव, सोमालिया, जिबूती, यमन और ओमान देश के तट भी इस सागर से लगते हैं। मुख्य बंदरगाह यमन, कराची, मुंबई और चाबाहर है।

4. अरब सागर विगत 1,500 लाख वर्षों में ही निर्मित हुआ है। जब भारतीय उपमहाद्वीप उत्तर की ओर बढ़ा और एशिया से टकराया था। सोकोत्रा से दक्षिण की ओर जलमग्न कार्ल्सबर्ग कटक है जो अरब सागर को दो मुख्य बेसिनों, पूर्व की ओर अरब बेसिन और पश्चिम की ओर सोमाली बेसिन में बांटता है। इसके अलावा ओमान की खाड़ी उत्तर में सागर को फारस की खाड़ी से हॉरमुज जलडमरूमध्य के माध्यम से जोड़ती है। दूसरी ओर पश्चिम में अदन की खाड़ी उसे बाब एल मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से लाल सागर से जोड़ती है।

5. अरब सागर के सिंधु सागर, अखजर सागर और एरिथ्रियन सागर के नाम से भी जाना जाता है। सिंधु नदी इसी सागर में विसर्तित हो जाती है। सिंधु नदी के अलावा नेत्रवती, शरवती, नर्मदा, ताप्ती, माही और केरल की नदियां शामिल हैं। किसी काल में सरस्वती नदी भी इसी में विसर्जित होती थी।



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