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कुंभ मेले में 71 साल बाद बन रहा है विलक्षण संयोग, मौनी अमावस्या पर होगा शाही स्नान

रविवार,फ़रवरी 3, 2019
kumbh shahi snan
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इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये से नाराज अखाड़ों के साधुओं ने प्रयाग में अगले वर्ष लगने वाले कुंभ मेले में शाही स्नान नहीं करने का आज निर्णय किया।
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भोपाल। मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में अगले वर्ष अप्रैल माह में होने वाले सिंहस्थ-2016 (कुंभ) में किन्नर समुदाय भी शामिल होंगे और यहां किन्नरों का एक अलग अखाड़ा भी होगा।
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कांग्रेस के शासनकाल में जहां प्रदेश में 10-15 घंटे बिजली कटौती होती थी, वहीं आज स्थिति यह हो चुकी है प्रदेश में सरप्लस बिजली पैदा होने लगी है। इसकी बदौलत आज हम दूसरे को बिजली बेचने की स्थिति में आ गए हैं।
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मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में अगले वर्ष होने वाले सिंहस्थ महापर्व में किन्नर अखाड़े के गठन एवं परी (महिला) अखाड़े को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् द्वारा मान्यता नहीं दिए जाने से पिछले सिंहस्थ 2004 की तरह विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।
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श्वभर में आस्था के लिए लाखों लोगों के एकत्र होने के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन नासिक सिंहस्थ कुंभ के मद्देनजर आज (शुक्रवार को) त्र्यंबकेश्वर में तीसरा और अंतिम ‘शाही स्नान’ संपन्न होगा। हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से यह हर 12 साल में आयोजित होता है।
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नासिक के त्र्यंबकेश्वर में चल रहे कुंभ मेले के दौरान शुक्रवार को तीसरा और अंतिम ‘शाही स्नान’ होगा। जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा क‍ि इस दौरान सुबह 4.15 से दोपहर 12 बजे तक 10 अखाड़ों से जुड़े हजारों ऋषि, महंत और साधु कुशवर्त तीर्थ में पवित्र ...
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भारी बारिश के बीच शुक्रवार को कुंभ मेले के आखिरी दिन हजारों संतों और भक्तों ने यहां रामकुंड में ‘शाही स्नान’ किया। निर्मोही, निर्वाणी और दिगंबर 3 अखाड़ों से संबंध रखने वाले संत, तपोवन इलाके के लक्ष्मीनारायण मंदिर से गोदावरी नदी के तट पर स्थित ...
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हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से यह हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन होता होता है। इस बार 2016 में इसका आयोजन उज्जैन में होगा। धारणा है कि कुंभ के दौरान इन स्थानों में नदियों में पवित्र स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।
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कुंभ, अर्धकुंभ और महाकुंभ आते ही लाखों की संख्या में आपको नागा बाबा डुबकी लगाते हुए दिखाई दे जाएंगे। लेकिन, कभी किसी ने सोचा है कि नागा बाबा कहां से आते हैं और कहां चले जाते हैं?
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नागा साधु अपने पूरे शरीर पर भभूत मले रहते हैं। आखिर क्यों? दरअसल नग्न अवस्था मे भस्मी या भभूत ही उनका वस्त्र होता है। यह भभूत उन्हें बहुत सारी आपदाओं से बचाती है, जैसे मच्‍छर या वायरल। इसे नागा साधुओं का प्रमुख श्रृंगार कहा जाता है।
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कुंभ में 'पान' खाना पाप है...!

मंगलवार,जुलाई 14, 2015
ताम्बूल अर्थात् पान होता है। पान का दान करने से मनुष्य पापों से छुटकारा पा जाता है, जबकि पान खाने से पाप होता है। वह पाप पान (ताम्बूल) दान करने से नष्ट हो जाता है। पान का पत्ता, इसके आगे का हिस्सा, इसके नाड़ी तंतु, चूना और रात के समय कत्था खाने से ...
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आचार्य शंकर द्वारा संन्यासियों की पहले से चली आ रही परंपरा को जब संगठित किया तो उसे नाम दिया- दशनामी साधु संघ। दीक्षा के समय प्रत्येक दशनामी जैसा कि उसके नाम से ही स्पष्ट है, निम्न नामों, गिरि, पुरी, भारती, वन, अरण्य, पर्वत, सागर, तीर्थ, आश्रम या ...
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बदलते वक्त में जहां भारत का तकनीकी चेहरा बदला है, वहीं कुंभ आयोजन भी अब हाईटेक हो गए हैं। अब कुंभ के आयोजन में तकनीक का सहारा लेकर उसे और सफल और सुफल बनाने में पहले की अपेक्षा ज्यादा मदद मिल रही है। तकनीक के जरिए अब तो अंतरिक्ष से भी कुंभ मेले के ...
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उदासीन समुदाय अखाड़ा परिचय

मंगलवार,जुलाई 14, 2015
उदासीन का शाब्दिक अर्थ है उत्+आसीन= उत् = ऊंचा उठा हुआ अर्थात ब्रह्रा में आसीन = स्थित, समाधिस्थ। यहां प्रस्तुत है छोटे उदासीन अखाड़ें के महंतों की जानकारी।
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भारत में नागालैंड नाम का एक स्थान है। भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में ही नागवंशी, नागा जाति और दसनामी संप्रदाय के लोग रहते आए हैं। भारत का एक संप्रदाय नाथ संप्रदाय भी दसनामी संप्रदाय से ही संबंध रखता है। दरअसल शैव पंथ से बहुत सारे संन्यासी पंथों और ...
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पौराणिक कथाओं अनुसार देवता और राक्षसों के सहयोग से समुद्र मंथन के पश्चात् अमृत कलश की प्राप्ति हुई। जिस पर अधिकार जमाने को लेकर देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान अमृत कलश से अमृत की कुछ बूंदे निकलकर पृथ्वी के चार स्थानों पर गिरी।
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श्री गोपालदत्त शास्त्री महाराज जो रामानुज सम्प्रदाय के आचार्य हैं, ने एक लघु पुस्तिका 'कुंभ महात्म्य' के नाम से लिखी है, जिसमें 'कुंभ पर्व की प्रचलित तीन कथाएं' शीर्षक से जिन कथाओं का उल्लेख किया गया है उनमें सर्वोपरि महत्ता समुद्र-मंथन से सम्बद्ध ...
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नागा साधुओं की लोकप्रियता है। संन्यासी संप्रदाय से जुड़े साधुओं का संसार और गृहस्थ जीवन से कोई लेना-देना नहीं होता। गृहस्थ जीवन जितना कठिन होता है उससे सौ गुना ज्यादा कठिन नागाओं का जीवन है।
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विश्वभर में आस्था के लिए लाखों लोगों के एकत्र होने के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन सिंहस्थ कुंभ का आज विधिवत रूप से शुभारंभ हो गया। ध्वजारोहण के एक परंपरागत समारोह के साथ हजारों लोगों ने दो शहरों में गोदावरी नदी में कुशावर्त और रामकुंड में डुबकी लगाई।
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नासिक। धरती पर होने वाले सबसे बड़े धार्मिक समागमों में से एक, 'सिंहस्थ कुंभ मेला' आज से शुरू होने जा रहा है जिसके लिए बड़ी संख्या में साधु और श्रद्धालु शहर पहुंच रहे हैं।
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गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर शाही स्नान के साथ ही 14 जनवरी से शुरु हुए दुनिया के सबसे विशाल धार्मिक मेले प्रयाग के महाकुंभ का शिवरात्रि पर समापन हो जाएगा।
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कुंभ नगरी। विश्‍व के सबसे बड़े मेले महाकुंभ में पांचवें स्नान माघी पूर्णिमा पर 60 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था और विश्‍वास की डुबकी लगाई। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए थे।
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कुंभ नगरी। पिछले एक माह से संगम किनारे घर गृहस्थी से दूर रहकर जप-तप कर रहे लोगों का कल्पवास आज पूरा हो गया और वो आज फिर से अपने-अपने घरों को लौट जाएंगे। इस दौरान कल्पवासी घर जाते समय तुलसी का बिरवा और जौ के पौधों को प्रसाद स्वरूप अपने साथ ले जाएंगे।
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इस कुंभ में शाही स्नान की पांच तिथियां हैं- (online maha kumbh snan) पहली 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन, दूसरी 27 जनवरी पौष पूर्णिमा के दिन, तीसरी 10 फरवरी मौन अमावस्या के दिन, चौथी 15 फरवरी बसंत पंचमी के दिन और पांचवी 25 फरवरी माघी पूर्णिमा के दिन। ...
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महाकुंभ मेला क्षेत्र में जिन-जिन स्थलों पर जल भराव होता है, उन सभी जगहों पर एंटीलार्वा की दवा का छिड़काव किया जा रहा है। कुंभ मेले के प्रभारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. सुरेश द्विवेदी ने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र मे 300 कर्मचारी लग कर फोनटॉन मशीन, ...
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इलाहाबाद। समाप्ति की ओर अग्रसर दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक महोत्सव में गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी के पावन संगम में से चुम्बक की मदद से पैसा निकालने का धन्धा जोरों पर है।
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इलाहाबाद। इलाहाबाद के संगम तट पर आयोजित कुंभ के मेले में इस बार रिकार्ड तोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया। साधुओं के तीन शाही स्नान 14 जनवरी, 10 फरवरी और अंतिम 15 फरवरी को सम्पन्न हो चुके हैं लेकिन कुंभ का मेला जारी है। अंतिम स्नान 10 मार्च को ...
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इलाहाबाद। बसंत पंचमी के मौके पर 70 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को संगम में डुबकी लगाई। इस मौके पर विभिन्न अखाड़ों के संन्यासियों ने भी महाकुंभ के तीसरे और अंतिम ‘शाही स्नान’ में हिस्सा लिया। उधर आज तड़के कुंभ मेला परिसर में लगी आग में दो ...
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पिछले दिनों मौनी अमावस्या पर इलाहाबाद स्टेशन पर हुए हादसे में जहां तीन दर्जन के लगभग लोगों की मौत हो गई थी, वही कई दर्जन श्रद्धालुओं को चोटें आईं थी लेकिन वसंत पंचमी पर होने वाले स्थान के लिए एक दिन पूर्व ही कई लाख श्रद्धालु संगम किनारे पहुंच गए और ...
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इलाहाबाद। धर्म और अध्यातम की नगरी यानी की कुंभ नगरी में प्रेम का दिन बड़े ही अनूठे अंदाज में मनाया गया। आज संगम तट सैकड़ों लोगों ने इस दिन को मां गंगा को समर्पित कर दिया।
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इलाहाबाद। समय के साथ कुंभ के पारंपरिक स्वरूप पर आधुनिकता और महंगाई का असर साफ देखा जा रहा है। एक तरफ कुंभ से राजसी ठाट बाट नदारद हो रहे हैं तो दूसरी तरफ कुंभ आयोजकों और श्रद्धालुओं पर महंगाई का असर भी साफ देखा जा रहा है।
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आमतौर पर ‍फिल्मों में बिछड़ कर अंत में मिलने की कहानी सर्वविदित है, लेकिन महाकुंभ में यह हकीकत में हो रहा है। गत 14 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ में अब तक तीन लाख से अधिक लोग अपनों से बिछड़ कर मिल चुके हैं।
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