घर की सुख-शांति के लिए वह पंडितों के यहाँ चक्कर लगाते-लगाते थक गई पर उसके परिवार की परेशानियाँ कम नहीं हुईं। पति की असहमति के बावजूद उसने अपना मकान एक प्रसिद्ध वास्तुशास्त्री को दिखाया। वास्तुशास्त्री ने मकान के निर्माण में कोई वास्तुदोष नहीं पाया परंतु बेकार पड़ा पुराना पंखा, पुराना संदूक और पुरानी अलमारी घर से शीघ्र निकालने की सलाह दी।
दूसरे ही दिन उसने तीनों पुरानी चीजें अपनी कामवाली बाई को सस्ते में बेच दीं।
'अब बाई के घर की सुख-शांति का क्या होगा! पति ने व्यंग्य से मुस्कराते हुए पत्नी से पूछा था।