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तिरंगे को सलाम :आज नमन तिरंगे को सभी बारम्बार करें...

शनिवार,अगस्त 13, 2022
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रक्षा बंधन का त्योहार भाई-बहन का एक मीठा त्योहार है। यहां पढ़ें हृदय को प्रभावित करने वाली भाई के प्रेम की एक मार्मिक कविता- मेरी एक बहन होती, सपनों के आकाश में उड़ती, सीधे दिल से वो आ जुड़ती। रिश्तों को परिभाषित करती, होती वो हम सबका मोती, मेरी ...
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नहीं टूटता कुछ भी एक बार में न अखरोट, न नारियल, न पहाड़ या दिल पिता का!
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poem on tulsidas श्री रामचरितमानस के रचियता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास पर रोचक हिन्दी कविता यहां पढ़ें। रामचरित का हर प्रसंग, जीवन रस मन में उतरा होगा। वही जीवन रस चौपाईयां बनकर, आपकी कलम से बह निकला होगा। ramcharitmanas poem
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19 जुलाई को हिन्दी के प्रसिद्ध कवि गोपालदास नीरज (Indian Poet Gopaldas Neeraj) की पुण्यतिथि है। पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित गोपालदास 'नीरज' एक हिन्दी साहित्यकार (Hindi literature), शिक्षक थे। वे ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्हें शिक्षा और साहित्य ...
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अलसुबह से देर रात मशीन सी भागती हूं मरे अस्तित्व के साथ आधी रात जागती हूं
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एक सुबह सुहानी खिल आई इठलाती, नभ ललचाए आ बैठे सुबह की गोद में, धूप देख शरमा पड़ी, सूरज हो गया रुआंसा, गगन की मादकता से धरा को मिली राहत
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मेरे कान्हा की प्यारी मुरतिया, मन में बस जाए इसकी सुरतिया, गोकुल धाम से कान्हा आए, जमुना किनारे बंसी बजाए, भागी-दौड़ी चली आए
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नहीं देख पाते हैं कई बार बहुत सारे चेहरे ठीक से या उनकी आंखें ही जी भर कर होती हैं जबकि ठीक सामने आंखों के
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फादर्स डे पर सहबा जाफरी की मर्मस्पर्शी कविता- पापा मेरी नन्ही दुनिया, तुमसे मिल कर पली-बढ़ी आज तेरी ये नन्ही बढ़कर, तुझसे इतनी दूर खड़ी तुमने ही तो सिखलाया था, ये संसार तो छोटा है तेरे पंखों में दम है तो, नील गगन भी छोटा है कोई न हो जब साथ ...
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रिश्तों की सामयिकता, उपयोगिता, आवश्यकता, उपादेयता, अनुज्ञा और उनमें लिपटे संवेदनशील रसायनों का आस्वादन कराती डॉ. रवीन्द्र नारायण पहलवान की छोटी सी यह बड़ी कविता है।
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Kabir ke dohe dharm par- कबीर, एक संत जो सालों पहले वह कह गए हैं जो आज भी प्रासंगिक है। धर्म के नाम पर आज जब राजनीति हिंसक हो चली है तब कबीर जयंती पर हम लाए हैं कुछ ऐसे दोहे जो पूरी ताकत से धर्म के दोगले चरित्र पर प्रहार करते हैं।
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14 जून 2022 बुधवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूर्णिमा के दिन संत कबीरदासजी की जयंती है, जानिए इस अवसर पर संत कबीरदासजी के 10 लोकप्रिय दोहे...
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-सतगुरु की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार. लोचन अनंत उघाड़िया, अनंत दिखावण हार. -सतगुरु सांचा सुरिवां, सबद ज्यूं बाह्या एक. लगत ही मैं मिल गया, पड्या कलैजे छैक. जानिए संत कबीर के गुरु पर रचे दोहे
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एक और पेड़- 5 जून मैंने कोई कविता नहीं लिखी...एक दिन में कुछ शब्दों में प्रकृति की खूबसूरती समेट कैसे पाती....कैसे लिखा जाता हरे रंग का तस्वीरों से गायब हो जाना,कैसे शब्दों में पिरोए जाते कुल्हाड़ी के वार हाथों के घेरे से भी बड़े तनों पर चल रही ...
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पर्यावरण दिवस पर कविता : हाथों में कुल्हाड़ी को देखा तो बहुत रोया इक पेड़ जो घबराकर रोया तो बहुत रोया जब पेड़ नहीं होंगे तो नीड़ कहां होंगे इक डाल के पंछी ने सोचा तो बहुत रोया दम घुटता है सांसों का जियें तो जियें कैसे... इंसान ने सेहत को खोया ...
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Hindi Journalism Day Poem, कर्तव्यनिष्ठ पत्रकार अपना कर्म निभाते, वे भोर की प्रथम किरण से जाग जाते। रात्रि के अंत तक सब खबर खोज लाते, निष्पक्ष भाव से हम तक सूचना पहुंचाते।।
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सिया जू की प्यारी मिथिला नगरिया, देखो बरात ले के आए हैं। लक्ष्मण राम संवरिया, बरात को देखकर सखिया मुस्काई
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ख़ुशबू उड़ाती, रंगतवाली तेज़ चटकती अदरकवाली दूधो नहाती है, छनछन उबलती है बलखाती इतराती प्याली में उतरती है गुलज़ार लम्हों सी होती है चाय इतवार की नींद सी होती है चाय चाहे जितनी मिल जाए दिल कहता है... थोड़ी और, थोड़ी और
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शिव को कौन रख सका बंदी? देख रहा परमभक्त गण नंदी.....!!! समाधिस्थ शंकर हो गए जागृत, रूद्रवीणा, डमरू, मृदंग झंकृत। अब हुआ, नंदी प्रतीक्षा का अंत, विस्मृत प्रयास विफल, सर्वस्मृत।। शिव.....परमभक्त गण नंदी.....!!!
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