sahitya | हर शख़्स तड़पता हुआ मिला
रोहित जैन
इश्क़ हमको मिला तो बनके इश्तिहार मिला
नुमाइशों से भरा आपका किरदार मिला
हर एक शख़्स यहाँ हमको बेक़रार मिला
हर एक आँख में खुशियों का इंतज़ार मिला
यूँ तो दुनिया में बहुत लोग मिले थे हमको
जिसे भी ढ़ूँढ़ना चाहा वो ही फ़रार मिला
कोई आवाज़ सुनाई तो दे रही थी हमें
मगर उठाई नज़र तो फ़क़त ग़ुबार मिला
हर एक शख़्स तड़पता हुआ मिला हमको
हर एक सिम्त हमें ग़म का कारोबार मिला
मै उसको कैसे अपना हालेदिल बयाँ करता
बेइख़्तियार मिला मुझको जितनी बार मिला
इसे क़िस्मत कहूँ या ज़िंदगी का खेल कहूँ
हर एक राह का पत्थर हमें मज़ार मिला
किसी शराब में तासीर वो नहीं पाई
ग़मेदुनिया में जो प्यारे हमें ख़ुमार मिला
किसी को वास्ता नहीं है किसी से भी यहाँ
हर एक शख़्स यहाँ मुझको रहगुज़ार मिला
कि जैसे बू छुपी हुई हो फूल में 'रोहित'
हर एक राख में सोया हुआ शरार मिला।
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नुमाइशों से भरा आपका किरदार मिला
हर एक शख़्स यहाँ हमको बेक़रार मिला
हर एक आँख में खुशियों का इंतज़ार मिला
यूँ तो दुनिया में बहुत लोग मिले थे हमको
जिसे भी ढ़ूँढ़ना चाहा वो ही फ़रार मिला
कोई आवाज़ सुनाई तो दे रही थी हमें
मगर उठाई नज़र तो फ़क़त ग़ुबार मिला
हर एक शख़्स तड़पता हुआ मिला हमको
हर एक सिम्त हमें ग़म का कारोबार मिला
मै उसको कैसे अपना हालेदिल बयाँ करता
बेइख़्तियार मिला मुझको जितनी बार मिला
इसे क़िस्मत कहूँ या ज़िंदगी का खेल कहूँ
हर एक राह का पत्थर हमें मज़ार मिला
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ग़मेदुनिया में जो प्यारे हमें ख़ुमार मिला
किसी को वास्ता नहीं है किसी से भी यहाँ
हर एक शख़्स यहाँ मुझको रहगुज़ार मिला
कि जैसे बू छुपी हुई हो फूल में 'रोहित'
हर एक राख में सोया हुआ शरार मिला।

