गुरुवार, 22 जनवरी 2026
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
  6. सोचा न था...
Written By WD

सोचा न था...

डॉ. शंभुनाथ आचार्य

हिन्दी कविता
वक्त धोखा इस तरह दे जाएगा सोचा न था,
आदमी इस हद तलक गिर जाएगा सोचा न था।

स्वर्ग धरती पर उठा लाने की कोशिश में स्वयं,
आदमी ही स्वर्ग को उठ जाएगा सोचा न था।

सींच कर अपने पसीने से जिसे पाला किए,
बागवां उस फूल से छल जाएगा सोचा न था।

हम बनाते ही रहे नक्शा नए निर्माण का,
मृत्यु में निर्माण यों ढल जाएगा सोचा न था।

वक्त की जादूगरी समझा न कोई आज तक,
कब कहाँ कैसे सभी छूट जाएगा सोचा न था।