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साथ-साथ उड़ सकते थे
देवेन्द्र आर्य मैंने तुम्हारे लिए छोड़ी थोड़ी पृथ्वीतुमने मेरे लिए छोड़ दिया थोड़ा आकाशहम दोनो ने मिल करएक-दूसरे के लिए पर्याप्त जगह बनाई।अब हम साथ-साथ रह सकते थेएक-दूसरे के बाहरएक-दूसरे के भीतर साथ-साथउड़ सकते थे।साभार: कविता कोश