लड़की जीना चाहती है
कुमार मुकुल
समय की धूप से सँवलाईसलोनी-सी लड़की है वहजिसकी आँखें अपने वक्त की पीड़ा कोअसाधारण ढंग से उद्भासित करती छिटका देती हैविस्फारित कोरों तकजहाँ वर्तमान की गर्दलगातारउस चमक को पीना चाहती हैपर लड़की जीना चाहती हैअनवरत। आँसू उसकी पलकों की कोरों परमचलते रहते हैंसंशय के दौर चलते रहते हैंगुस्सा की-बोर्ड पर चलती उँगलियों के पोरों से छिटकता रहता हैशून्य के परदे पर और वह बहती रहती हैविडंबनाओं के किनारे काटती।