- लाइफ स्टाइल
» - साहित्य
» - काव्य-संसार
लोग तंग दिल हो गए हैं
त्रिलोक महावर तब और अबकस्बा छोड़कर गया थाशहर मिला हैकस्बे में मैं जाना जाता था पिता के नाम सेफिर दोनों एक-दूसरे के नाम सेशहर में पहचान गुम होने लगी हैगनी नहीं रहेसादिक ख़ान हैडमास्टर का घरतब्दील हो गया कॉम्प्लेक्स मेंघर के सामने का नीमठूँठ भर रह गयाजिसकी छाँव में पड़ा था कभी प्रेम का पहला पाठकदम के पेड़ के पीछेनारियल के दरख़्त परसूरज सुस्ताता थाशाम को घर लौटने से पहलेवहाँ अब है कांक्रीट का जंगलट्यूब लाईट की जगहसोडियम वैभर लैम्प ने ले ली हैसड़कें चौड़ी हो गई हैंपर लोग तंग दिल हो गए हैं।साभार : संबोधन