Poem | रख गया गुलाब कब्र पर
दीक्षित दनकौरी
मुद्दआ बयान हो गया
सर लहूहुहान हो गया
कैद से रिहाई क्या मिली
तंग आसमान हो गया
तेरे सिर्फ एक बयान से
कोई बेजुबान हो गया
छिन गया तो काग़जे-हयात
खत्म इम्तिहान हो गया
रख गया गुलाब कब्र पर
कौन कद्रदान हो गया।
ND
सर लहूहुहान हो गया
कैद से रिहाई क्या मिली
तंग आसमान हो गया
तेरे सिर्फ एक बयान से
कोई बेजुबान हो गया
छिन गया तो काग़जे-हयात
खत्म इम्तिहान हो गया
रख गया गुलाब कब्र पर
कौन कद्रदान हो गया।

