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Written By स्मृति आदित्य

यादों की मासूम तितली

फाल्गुनी

यादों की मासूम तितली
ND
हर वक्त हर हाल में
मेरे साथ रही
तुम्हारी यादों की तितली

उड़ती रही, मँडराती रही
हवा के संग फरफराती रही
तुम्हारी यादों की तितली

रंगबिरंगी और आकर्षक
नाजुक और खुशनुमा

पकड़ी नहीं जा सकी मुझसे
बस, जब भी पकड़ना चाहा
कठोर होकर,

ना जाने कितनी और
उग आई मुझमें ही
जैसे मैं भूल गई थी
उन्हें खुद में ही बो कर... !

उदासी के लंबे रेगिस्तान में
जब कोई नहीं था
मेरे पास
रही
बस वही ति‍तली
मेरे आसपास।

जब तक साँसों के क्यारी में
महक रही है
तुम्हारी नजरों की रातरानी

थिरकती रहेगी मुझमें
यादों की सुकोमल तितली

अनछुई और अधखिली
कुछ-कुछ सूखी, कुछ-कुछ गीली
यादों की मासूम तितली।
लेखक के बारे में
स्मृति आदित्य